इलैक्ट्रौनिक कॉमर्स या ई-कॉमर्स ने भारत में व्यवसाय के तरीके को ही बदल दिया है। वर्तमान में, भारत में ई-कॉमर्स इंडस्ट्री लैवी के विभिन्न करों का सामना कर रही है। प्रत्येक राज्य ने ई-कॉमर्स इंडस्ट्री पर अपने ही नियम और कर लगाए हुए हैं। विभिन्न प्रकार की ई-कॉमर्स कार्यवाही पर कर व्यवहार की स्पष्टता की कमी, और नए पहलू जैसे ई-वॉलट और कैशबैक, का नतीजा रहा है, इंडस्ट्री के लिए अव्यवस्थित वातावरण।

ई-कॉमर्स फर्में, जी एस टी के लागू होने से बेहतर स्पष्टता और राज्य के विशिष्ट नियमों व लैविज़ के हटने की आशा करती हैं। जी एस टी कानून का ड्राफट मॉडल ई-कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए विशिष्ट नियमो को पहचानता हैं। इस बलॉग में, हम जी एस टी में ई-कॉमर्स के सबंध में वशेष प्रावधानो को देखेंगे।

  • ई-कॉमर्स ऑपरेटर और
  • ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म पर सप्लायर्ज़

चलिए जी एस टी के तहत ई-कॉमर्स के प्लैटफार्म पर सप्लायर और ई-कॉमर्स ऑपरेटर की ओर से जो आवश्कताएँ हैं उन्हें विस्तार में देखें।

ई-कॉमर्स ऑपरेटर

ई-कॉमर्स ऑपरेटर वह व्यक्ति है जो डिजीटल या इलैक्ट्रानिक सुविधा या इलैक्ट्रानिक कामर्स के प्लेटफार्म का मालिक है, उसका संचालन या प्रबंधन करता है। जी एस टी के तहत ई-कॉमर्स ऑपरेटर से जो आवश्यकताऐं हैं वे हैं –
1. अनिवार्य पंजीकरण
सभी ई-कॉमर्स आपरेटर्ज़ का जी एस टी के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है। इसका अर्थ है कि टर्नओवर का विचार किए बिना, जी एस टी के तहत पंजीकरण करना ही होगा।
2. सूचित सेवाओं पर ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा किया जाने वाला कर भुगतान
कुछ सेवा श्रेणियों को सूचित किया जा सकता है , जिनकी सप्लाई पर, ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा कर का भुगतान किया जाना चाहिए, न कि सप्लायर द्वारा ।इस सबंध में,

      • यदि ई-कॉमर्स ऑपरेटर का राज्य में दफ्तर नही है, ई-कॉमर्स ऑपरेटर का राज्य में किसी भी कार्य के लिए प्रतिनिधित्व करने वाला कोई भी व्यक्ति टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदयी होगा।
      • यदि ई-कॉमर्स ऑपरेटर का राज्य में दफ्तर नहीं है, और राज्य में कोई प्रतिनिधि भी नहीं है, ई-कॉमर्स ऑपरेटर को राज्य में कर के भुगतान के लिए किसी व्यक्ति को नियुक्त करना चाहिए, और यह व्यक्ति कर के भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा।

3. ई-कॉमर्स ऑपरेटर को स्रोत से कर वसूल करना होगा पड़ेगा
प्रत्येक ई-कॉमर्स ऑपरेटर को उनके प्लैटफॉर्म द्वारा की गई हैं कराधीन सप्लाई पर 2% कर वसूल करना चाहिए, जहाँ ऐसी सप्लाई के सम्बंध मे, प्रतिफल, ऑपरेटर द्वारा वसूला जाना चाहिए।

कराधीन सप्लाई का असल मूल्य = ऑपरेटर के ज़रिए सभी पंजीकृत कराधीन व्यक्तियों द्वारा की गई कराधीन सप्लाई का मूल्य ,सूचित सप्लाई को छोडकर जिस पर कर का भुगतान आपटर द्वारा किया गया है(-)सप्लायर्ज़ को वापिस किया गया कराधीन सप्लाई का मूल्य

उदाहरण: फास्ट डील्ज़ एक ई-कॉमर्स ऑपरेटर है। राकेश प्रा. लि. और रोहन प्रा. लि. फास्ट डील्ज़ के सप्लायर है। अक्तूबर’17 में फास्ट डील्ज़ पर निम्नलिखित सप्लाई की गई है।

फास्ट डील्ज़ का आउटवर्ड (बाह्य) सप्लाई रजिस्टर
सप्लायर
कराधीन सप्लाई (रू)लौटाई गई कराधीन सप्लाईकुल कराधीन सप्लाई (कराधीन सप्लाई कम कराधीन सप्लाई लौटाई गई (रू) )वसूला गया टी सी एस @2% (रू)
राकेश प्रा. लि.1,00,00,00010,00,00090,00,0001,80,000
रोहन प्रा. लि.2,00,00,00020,00,0001,80,00,0003,60,000
कुल3,00,00,00030,00,0002,70,00,0005,40,000

यहाँ, फास्ट डील्ज़ की कुल कराधीन सप्लाई रू 2,70,00,000 है और वसूला गया जी एस टी रु 5,40.000।

4. भुगतान और कर भुगतान प्रक्रिया

      • महीने की 10 तारीख को, ई-कॉमर्स ऑपरेटर को फॉर्म जी एस टी आर-8 को प्रस्तुत करना होगा, जिसमें, वापिस की गई सप्लाई के समेत, आउटवर्ड सप्लाई की सारा विवरण हो, जो प्लैटफार्म के जरिए पिछले महीने की गई, । फॉर्म जी एस टी आर-8 में, पंजीकृत कराधीन व्यक्तियों को की सप्लाई की इनवायस- वाइज़ विवरण और अपंजीकृत व्यक्तियो को की सप्लाई का संचित मूल्य शामिल होना चाहिए। ई-कॉमर्स ऑपरेटर को भी सप्लायर्ज़ द्वारा वसूल किया कर का भुगतान करना होगा।
        GST-Ecommerce-Operator
      • महीने की 21 तारीख को, यदि ई-कॉमर्स ऑपरेटर और प्लैटफार्म पर सप्लायर्ज़ के द्वारा रिपोर्ट की गई सप्लाई के बीच कोई अंतर है तो वह फॉर्म जी एस टी – आई टी सी – 1 में उपलब्ध कराई जाती है। यह अंतर रिटर्न में संशोधित किया जाना चाहिए, उस महीने के लिए जिसमें यह सुचित की गई है। जिसमें ऊपर दिए उदाहरण में, फास्ट डील्ज़ फॉर्म जी एस टी आर – 8 को प्रस्तुत करता है, 10 नवंबर ’17 पर अक्तूबर की सप्लाई के लिए। यदि 21 नवंबर ’17 में फॉर्म जी एस टी – आई टी सी – 1 में अंतर दर्ज होता है तो यह नवंबर ’17 की रिटर्न में संशोधित कर लेना चाहिए जो कि 10 दिसंबर ’17 को फाईल किया जाना है।/li>

ई-कॉमर्स प्लैटफार्म पर सप्लायर्ज़

ई-कॉमर्स प्लैटफार्म पर जो सप्लायर्ज़ हैं वो वे व्यक्ति हैं जो ई-कॉमर्स प्लैटफार्म पर सामान या सेवाओं को सप्लाई करता है। जी एस टी के तहत ई-कॉमर्स प्लैटफार्म पर सप्लायर्ज़ से जो आवश्यकताऐं हैं वे हैं –

1. अनिवार्य पंजीकरण
ई-कॉमर्स प्लैटफार्म पर सभी सप्लायर्ज़ का जी एस टी के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है। तो चाहे ई-कॉमर्स ऑपरेटर जिनका सकल टर्नओवर सीमा रेखा से ऊपर नही है, उनको जी एस टी के तहत पंजीकरण करना अनिवार्य है।

2. कम्पोज़ीशन स्कीम के लिए अयोग्यता
वह व्यक्ति जो ई-कॉमर्स ऑपरेटर के माध्यम से सामान या सेवाएँ सप्लाई करता है, वह कम्पोज़ीशन स्कीम के तहत पंजीकृत होने का पात्र नहीं बनता तो चाहे व्यक्ति का सकल टर्नओवर 50 लाख से ऊपर न हो, उसके पास कम्पोज़ीन कर भुगतान कर्ता बनने का विकल्प नहीं है।

3.भुगतान प्रक्रिया
ई-कॉमर्स प्लैटफार्म पर सप्लायर को डीलर पर लागू होने वाले जी एस टी भुगतान प्रक्रिया का पालन करना होगा . इसके साथ ही, ई-कॉमर्स प्लैटफार्म के माध्यम से जो सप्लाई हो रही है, उसके स्म्बंध में निम्लिखित विवरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता है –

      • महीने की 10 तारीख को, सप्लायर को फॉर्म जी एस टी आर-1 प्रस्तुत करना होगा, जिससे ई-कॉमर्स प्लैटफार्म के माध्यम से की गई बाहय सप्लाई का विवरण होगा। फॉर्म जी एस टी आर-8 में, पंजीकृत कराधीन व्यक्तियों को की सप्लाई की इनवायस- वाइज़ विवरण और अपंजीकृत व्यक्तियो को की सप्लाई का कुल मूल्य शामिल होना चाहिए। ई-कॉमर्स ऑपरेटर को भी सप्लायर्ज़ द्वारा वसूल किया कर को भुगतान करना होगा।
      • महीने की 11 तारीख को, सप्लायर को फॉर्म जी एस टी आर -2ए उपलब्ध कराया जाएगा। ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा फाईल किया गए फॉर्म जी एस टी आर -8 के आधार पर ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा वसूल की गई पिछले महीने की कुल रकम भी ऑटो पोपुलेटिड हो जाएगी।
        GST-Ecommerce-Suppliers
      • महीने की 15 तारीख को, सप्लायर को फॉर्म जी एस टी आर-2 प्रस्तुत करना होगा, जिसमें ई-कॉमर्स आपरेटर द्वारा वसूले कर का विवरण स्वीकार या संशोधित किया जा सकता है। वसूला गया कर प्रावधान के आधार पर सप्लायर के इलैक्ट्रौनिक कैश लैजर में श्रेय हो जाएगा, जो कर उत्तरदायित्व के विपरीत सैट-ऑफ हो जाएगा।
      • महीने की 21 तारीख को, सप्लायर को फॉर्म जी एस टी आई टी सी-1 उपलब्ध कराया जाएगा। ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा रिपोर्ट की गई सप्लाई और प्रस्तुत सप्लाई के बीच के अंतर को दिखाया जाएगा। यह अंतर रिटर्न में संशोधित किया जाना चाहिए, उस महीने के लिए जिसमें यह सुचित की गई है। यदि संशोधित नही की गई और ऑपरेटर द्वारा प्रसतुत की गई सप्लाई का मूल्य सप्लायर द्वारा प्रसतुत किए गये मूल्य से अधिक है, रकम का यह अंतर ब्याज़ समेत, सप्लायर की टैक्स लायबिलिटी मे अगले महिने जोड दिया जाएगा।
        ऊपर दिए उदाहरण में, राकेश प्रा. लि. फॉर्म जी एस टी आर – 1 को प्रस्तुत करता है, 10 नवंबर ’17 को अक्तूबर की सप्लाई के लिए। यदि 21 नवंबर ’17 में फॉर्म जी एस टी – आई टी सी – 1 में अंतर दर्ज होता है तो यह नवंबर ’17 की रिटर्न में संशोधित कर लेना चाहिए जो कि 10 दिसंबर ’17 को फाईल किया जाना है।

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