जीएसटी का रुख करने के प्रावधानों के मामले में 26 नवम्बर 2016 को प्रकाशित संशोधित प्रारूप मॉडल जीएसटी कानून में महत्वपूर्ण बदलाए किए गए हैं। इस पोस्ट को संशोधित प्रारूप मानून में हुए बदलावों के साथ अद्यतन किया गया है।

 

जीएसटी का रुख करने के दिन, व्यापक रूप से ऐसे कई व्यावसाय होंगे जोकि निम्नलिखित श्रेणियों में से किसी एक के अंतर्गत आयेंगे:

  1. वे व्यावसाय जिन्हें मौजूदा कानून में निबंधित होने की आवश्यकता नहीं है लेकिन जीएसटी के अंतर्गत निबंधित होना होगा
  2. वे व्यावसाय जो छूट-प्राप्त वस्तुओं या सेवाओं के विनिर्माण या विक्रय में संलग्न हैं
  3. प्रथम स्तरीय विक्रेता या द्वितीय स्तरीय विक्रेता या निबंधित आयातक

1. वे व्यावसाय जिन्हें मौजूदा कानून में निबंधित होने की आवश्यकता नहीं है लेकिन जीएसटी कं अंतर्गत निबंधित होना होगा

केन्द्रीय उत्पाद अधिनियम एवं नियमों के अनुसार विनिर्माण इकाई को, यदि उसका सकल निकासी मूल्य 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है, पंजीकरण कराने और ड्यूटी डिस्जार्च करने की जरूरत होती है। इसी प्रकार, अगर वित्त वर्ष के दौरान आपका टर्नओवर अधिकतम सीमा से अधिक हो जाता है तो वैट के तहत पंजीकरण के भागी होते हैं। यह अधिकतम सीमा विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है।

संभव है कि आज आपकी अधिकतम सीमा निर्धारित सीमा को पार नहीं करने के कारण आप निबंधन के भागी नहीं हों। लेकिन अगर विशेष श्रेणी वाले राज्यों (अरुणाचल प्रदेश, असम, जम्मू एवं कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के लिए आपकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये से और भारत के बाकी हिस्सों के लिए 20 लाख रुपये से ज्यादा हो तो आपको जीएसटी के अंतर्गत निबंधन कराना होगा।

2. वे व्यावसाय जो छूट-प्राप्त वस्तुओं या सेवाओं के विनिर्माण या विक्रय में संलग्न हैं

आप फिलहाल छूट-प्राप्त वस्तुओं या सेवाओं के विनिर्माण, विक्रय एवं व्यवस्था में संलग्न हो सकते हैं, लेकिन जीएसटी का रुख करने के बाद ये सभी कर योग्य हो जायेंगे।

3. प्रथम स्तरीय विक्रेता या द्वितीय स्तरीय विक्रेता या निबंधित आयातक

अगर आप उत्पाद शुल्क के योग्य वस्तुओं का व्यापार करते हैं तो बतौर विक्रेता आप केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के अंतर्गत निबंधन के जिम्मेवार हैं। आप आज जो उत्पाद शुल्क अदा कर रहे हैं वह क्रेडिट के रूप में उपलब्ध नहीं होगा, क्योंकि प्रथम स्तरीय या द्वितीय स्तरीय विक्रेता चुकता उत्पाद शुल्क को उत्पाद के मूल्य में जोड़ देते हैं। अगर यह किसी विनिर्माता को बेचा जाता है, तब हस्तांतरित उत्पाद शुल्क का खरीदार विनिर्माता द्वारा सेनवैट (केन्द्रीय वैट) क्रेडिट के रूप दावा किया जाएगा।
इसी प्रकार, आपको बतौर आयातक केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के अंतर्गत आपके लिए निबंधन कराना जरूरी होगा, अगर आप वस्तुओं का आयात कर रहे हैं और लागू आयात शुल्क निष्पादित कर रहे हैं।
उपर्युक्त स्थिति में हर व्यापारी के मन में एक आम सवाल पैदा हो सकता है कि “जीएसटी लागू होने के पूर्व अंतिम दिन धारित स्‍टॉक पर क्या मुझे इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिल सकता है?”
हाँ, आपको इनपुट (कच्चे मालों), अर्ध-निर्मित मालों और तैयार मालों के क्लोजिंग स्‍टॉक में धारित इनपुट टैक्स क्रेडिट (सेनवैट, इनपुट वैट, एंट्री टैक्स और सर्विस टैक्स) का लाभ मिलेगा। हालाँकि, आपके क्लोजिंग स्‍टॉक में धारित इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेने के लिए आपको कुछ शर्तों को पूरा करना होगा।

आपके क्लोजिंग स्‍टॉक में धारित इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने के लिए योग्यता की शर्तें

आप अपने क्लोजिंग स्‍टॉक में धारित इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ ले सकते हैं, बशर्ते कि,

    • क्लोजिंग स्‍टॉक कच्चे मालों, अर्ध-निर्मित मालों या तैयार मालों के रूप में धारित है और इसे अनिवार्य रूप से केवल कर योग्य आपूर्तियों के लिए इस्तेमाल किया जाना है।
      Conditions for availing GST ITC on closing stock
    • इस तरह के क्रेडिट का लाभ मूल्य में कमी के रूप में प्राप्तिकर्ता को हस्तांतरित किया जाता है। मौजूदा कर व्यवस्था में शुल्क/टैक्स को उत्पाद लागत के रूप में जोड़ दिया जाता है क्योंकि इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) नहीं मिलता है। जीएसटी के अवस्थातंरण पर आइटीसी मिलेगा और इसकी स्वाभाविक परिणति आधार लागत में कमी और तत्पश्चात ग्राहकों को अंतिम रूप से कीमत में कमी के रूप में होगी।Price reduction due to gst
    • आप जीएसटी के अंतर्गत इनपुट टैक्स क्रेडिट के पात्र हैं। जीएसटी में, आप इनपुट टैक्स क्रेडिट के योग्य होंगे, बशर्ते कि आप नियमित करदाता हों। जीएसटी के अंतर्गत कंपोजिशन लेवी लेने वाले कर योग्य व्यक्ति को इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे का अधिकार नहीं है।Eligibility for ITC on closing stock
    • आपके पास इनपुट्स के क्लोजिंग स्‍टॉक (अर्ध-निर्मित माल और तैयार मालों सहित) के संबंध में इनवॉयस या कोई दूसरे निर्धारित शुल्क/कर अदायगी के कागजात उपलब्ध हैं।Tax documents needed for claiming GST Input tax credit
    • इनवॉयस या किसी दूसरे निर्धारित शुल्क/टैक्स अदायगी संबंधी कागजात की तारीख जीएसटी में अवस्थातंरण की तारीख से 12 महीनों के भीतर की हो।Carry forward Input tax credit to GST
    • इस अधिनियम के अंतर्गत सेवाओं के आपूर्तिकर्ता किसी निवारण के पात्र नहीं हैं।

 

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है।

रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स उत्पाद शुल्क वाली कारों एवं कार के स्पेयर पार्ट्स का निबंधित व्यापारी है। 1 मार्च 2017 को रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स ने स्पेयर पार्ट्स खरीदे और लेन-देन का विवरण निम्नलिखित प्रकार से हुआ:

तारीखस्‍टॉक का मालमात्रादर/मात्राकुल मूल्यवैट @14.5%उत्पाद शुल्क @12.5%
01-03-2017स्पेयर्स50 नग1500@ नग75,00010,8759,375

 

31 मार्च, 2017 को रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स के पास स्पेयर्स का क्लोजिंग स्‍टॉक 30 नग का है।

          • मौजूदा कर संरचना के अनुसार, रविन्द्र आॅटोमोबाइल्स बतौर क्रेडिट 10,875 रुपये का इनपुट वैट का लाभ ले सकता है और इस राशि को आउटपुट वैट के मुकाबले समायोजित कर सकता है। इसलिए इसे उत्पाद लागत में जोड़ दिया जाता है। अब जीएसटी में अवस्थांतरण के बाद रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स अपने द्वारा धारित क्लोजिंग स्‍टॉक पर उत्पाद शुल्क का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकता है।

अब उपर्युक्त उदाहरण के आधार पर क्लोजिंग स्‍टॉक पर उत्पाद शुल्क की गणना करें, जिसका लाभ इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में लिया जा सकता है।

31.3.2017 को क्लोजिंग स्‍टॉक30 नग
प्रति इकाई शुल्क (कुल उत्पाद शुल्क रु.9,375/50 नग)187.5/इकाई
क्लोजिंग स्‍टॉक पर शेष शुल्क (प्रति इकाई शुल्क 187.5/इकाई क्लोजिंग स्‍टॉक 30 नग)5,625

 

अब, रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स को पता है कि वे धारित क्लोजिंग स्‍टॉक पर 5,625 रुपये के उत्पाद शुल्क का लाभ ले सकते हैं, लेकिन क्या वे इस लाभ के पात्र हैं?
पात्रता के लिए रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स को निम्नलिखित शर्तें पूरी करने होंगी:

  1. धारित क्लोजिंग स्‍टॉक का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से कर योग्य आपूर्तियों में करना चाहिये अथवा ऐसा करने का इरादा होना चाहिये।
    हाँ, 30 नग का क्लोजिंग स्‍टॉक कर योग्य आपूर्तियों के लिए प्रयोग किया जाएगा।
  2. इस तरह के क्रेडिट का लाभ अनिवार्य रूप से घटी कीमतों के रूप में प्राप्तिकर्ता को हस्तांतरित किया जाना चाहिए।
    चूँकि इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध है, रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स आगे इसे उत्पाद लागत में नहीं जोड़ेगा। नतीतजन आधार लागत घट जाएगी और उसके बाद इसके फलस्वरूप कीमत घटेगी।
  3. वे जीएसटी के अंतर्गत इनपुट टैक्स क्रेडिट के पात्र हैं।
  4. उनके पास इनपुट (अर्ध-निर्ति मालों और तैयार मालों सहित) के क्लोजिंग स्‍टॉक से संबंधित इनवॉयस या कोई दूसरे निर्धारित शुल्क/टैक्स अदायगी के कागजात होने चाहिए।
    रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स के पास 30 नग के क्लोजिंग स्‍टॉक के संबंध में उनके आपूर्तिकर्ता (विनिर्माता) द्वारा जारी नियम 11 इनवॉयस है।
  5. इनवॉयस या किसी दूसरे निर्धारित शुल्क/टैक्स अदायगी संबंधी कागजात की तारीख अनिवार्य रूप से जीएसटी में अवस्थातंरण की तारीख से 12 महीनों के भीतर की होनी चाहिए।
    30 नग का क्लोजिंग स्‍टॉक 1.3.2017 की तारीख की खरीद से संबंधित है, जो जीएसटी लागू होने की अनुमानित तारीख 1.4.2017 से 12 महीने भीतर की है।

रविन्द्र ऑटोमोबाइल्स उपर्युक्त सभी शर्तें पूरी करता है और सीजीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में 5,625 रुपये के उत्पाद शुल्क का लाभ पाने के योग्य है।

 

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