स्वतन्त्र भारत में सबसे बड़ा टैक्स सुधार, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट (जीएसटी) अपने करदाता के लिए एक नई अवधारणा एक तश्तरी में लाया है, वह है “कम्पोजिशन कराधान”।

जाहिर है, यह मूल्य वर्धित कर व्यवस्था के लिए एक नई अवधारणा नहीं है। बहुत पहले 2003 में, इस अवधारणा को राज्य वैट एक्ट में पेश किया गया था, जिसके अंतर्गत डीलर को अपने घोषित कारोबार पर कर की निश्चित दर का भुगतान करना था, और कोई भी वैट सेट ऑफ / क्रेडिट आपूर्ति श्रृंखला में नहीं जाती है। उस कानून के तहत एक डीलर के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह था कि उन्हें खातों की उचित किताबें, या वैट कानून के तहत लेनदेन की गई सामग्री के रिकॉर्ड बनाए रखने की आवश्यकता नहीं थी। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि यदि वे खाते रखते थे तो यह संबंधित वैट कानूनों के तहत जांच के अधीन नहीं था।

जीएसटी व्यवस्था में कम्पोजिशन कराधान

मॉडल जीएसटी कानून में एक समान अवधारणा पेश की जाएगी। आइए इसका सार समझें-

  • मॉडल कानून की धारा 8 इस अवधारणा से संबंधित है
  • यह एक वैकल्पिक योजना है- करदाता के पास इसे चुनने या नहीं चुनने का विकल्प है
  • जीएसटी के तहत नियमित कर के बदले कर योग्य व्यक्ति के कारोबार पर निर्धारित दर पर गणना की गई राशि का भुगतान करने का प्रस्ताव है
  • जीएसटी परिषद द्वारा दर अधिसूचित की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, परिषद 7% से 9% की सीमा में एक दर निर्धारित कर रही है
  • इस योजना को अपनाने के लिए केंद्रीय या राज्य सरकार के सक्षम अधिकारी की अनुमति आवश्यक है
  • केवल एक पंजीकृत कर योग्य व्यक्ति ही योजना का चयन कर सकता है
  • ऐसे व्यक्ति का कुल कारोबार वित्तीय वर्ष में 50 लाख से अधिक नहीं होना चाहिए
  • अखिल भारतीय आधार पर एक ही पैन रखने वाले सभी कर योग्य व्यक्तियों के लिए कुल कारोबार की गणना की जाएगी
  • कुल कारोबार में कर योग्य, गैर-कर योग्य, छूट और निर्यात कारोबार के मूल्य शामिल हैं। हालांकि, रिवर्स चार्ज और अंदरूनी आपूर्ति शामिल नहीं हैं
  • इस योजना के तहत, कोई व्यक्ति न तो प्राप्तकर्ता से कर एकत्र करता है और न ही इनपुट कर क्रेडिट के लिए पात्र है।
  • यदि सक्षम अधिकारी के पास विश्वास करने का कारण है (दस्तावेजी सबूत के साथ या बिना !!!) तो योजना के तहत अनुमति रद्द की जा सकती है, कि :
      • कर योग्य व्यक्ति इस योजना के लिए पात्र नहीं था
      • पहले दी गई अनुमति गलत तरीके से दी गई थी

    (बेशक नोटिस और व्यक्तिगत सुनवाई के अवसर का प्रावधान लागू होंगे)।

  • इस तरह के रद्दीकरण का नतीजा यह होगा कि एक कर योग्य व्यक्ति कर के अन्तर (नियमित कर व कम्पोजिशन कर का अन्तर) और समकक्ष जुर्माना का भुगतान करेगा।

कुछ अनुत्तरित प्रश्न

इस योजना से संबंधित मॉडल कानून में कुछ अनुत्तरित प्रश्न हैं। आइए हम उन पर जाएं:

  • क्या होता है जब वित्तीय वर्ष के दौरान कारोबार निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है?
  • क्या कम्पोजिशन दर सीजीएसटी + एसजीएसटी या सीजीएसटी या एसजीएसटी होगी?
  • क्या यह योजना कर योग्य व्यक्तियों की किसी विशेष श्रेणी तक सीमित होगी या सभी के लिए खुली होगी?
  • यदि कर योग्य व्यक्ति की एक इकाई कानून के प्रावधान का अनुपालन करने में विफल रहती है, तो क्या एक समग्र करदाता के रूप में अन्य सभी इकाइयों की स्थिति रद्द हो जाती है?
  • क्या होता है यदि कोई कम्पोजिशन व्यक्ति कर एकत्र करता है? क्या इसे जब्त कर लिया जाएगा?

हमें आशा है कि उपरोक्त सभी प्रश्न अंतिम जीएसटी कानून और नियमों में उत्तरित होंगे।

अब जब हमने मॉडल जीएसटी कानून के अनुच्छेद 8 को विच्छेदित किया है, तो हम बहुत प्रचारित कम्पोजिशन कराधान को देखें।
निम्नलिखित उपयोग केस इसे बेहतर समझने में हमारी सहायता कर सकते हैं:
कृष्णा एजेंसी मैसूर शहर के लिए हिंदुस्तान यूनिलीवर के उत्पाद “सर्फ एक्सेल” का एक अधिकृत वितरक है। कृष्णा एजेंसी बैंगलोर से एचयूएल के राज्य वितरक एजेडसी प्राइवेट लिमिटेड से “सर्फ एक्सेल” खरीदती है। कृष्णा एजेंसी सर्फ एक्सेल को कौशिक स्टोर्स जैसे रिटेल आउटलेट को बेचती है।

कृष्णा एजेंसी और कौशिक स्टोर्स के लिए 4 अलग-अलग जीएसटी संयोजन संभव हैं।

मान्यताए

  1. सर्फ एक्सल मेटिक के 2 किग्रा पैक का एम.आर.पी 379 है (एमआरपी अभी भी कानूनी मेट्रोलॉजी अधिनियम 2009 के तहत प्रासंगिक होगा, हालांकि जीएसटी के तहत अप्रासंगिक हो जाएगा)
  2. जीएसटी की दर 20% अनुमानित है (सीजीएसटी +एसजीएसटी)
  3. कम्पोजिशन कराधान कारोबार पर 8% का अनुमानित हैं
  4. एफ.एम.सी.जी वितरक का अधिकतम विक्रय मूल्य निश्चित है और कानून के अनुसार खुदरा विक्रय एम.आर.पी या उससे कम पर मूल्य पर होना चाहिए
  5. 5. कम्पोजिशन वितरक न तो प्राप्तकर्ता से कर एकत्र करता है और नहीं वह इनपुट टेक्स क्रेडिट के लिए पात्र है

परिदृष्य 1

 सर्फ एक्सल मैटिक का एम.आर.पी (2 कि.ग्रा. पैक) – रूपये 379

 विवरणए.जेड.सी. प्रा.लि.कृष्णा एजेन्सी कौशिक स्टोर्स
लेनदेन का प्रकारB2BB2BB2C
जीएसटी विकल्पसामान्यसामान्यसामान्य
लागत मूल्य (अ)200220253
 विक्रय मूल्य (ब)220253316
जी एस टी @ 20%445163
कुल लागत264304379
घटाएँ इनपुट टेक्स क्रेडिट404451
शुद्ध कुल लागत224260328
मार्जिन कम वृद्धिशील जीएसटी 
मार्जिन (ब) – (अ)203363
घटाएँ कम्पोजिशन करNA
शुद्ध मार्जिन203363

कृष्णा एजेंसी और कौशिक स्टोर खरीद पर भुगतान किए गए जीएसटी को रिकवर कर रहे हैं, इसलिए जीएसटी लागत नहीं है।

परिदृष्य 2

सर्फ एक्सल मेटिक का एम.आर.पी (2 किग्रा पैक) – रुपये 379

  विवरणए.जेड.सी. प्रा.लि.कृष्णा एजेन्सी कौशिक स्टोर्स
लेनदेन का प्रकारB2BB2BB2C
जीएसटी विकल्पसामान्यकम्पोजिशनसामान्य
लागत मूल्य (अ)200264304
विक्रय मूल्य (ब)220304316
जी एस टी @ 20%44063
कुल लागत264304379
घटाएँ इनपुट टेक्स क्रेडिट4000
शुद्ध कुल लागत224304379
मार्जिन कम वृद्धिशील जीएसटी 
मार्जिन (ब) – (अ)204012
घटाएँ कम्पोजिशन करNA240
शुद्ध मार्जिन20 1612

जीएसटी लागत है क्योंकि कृष्णा एजेंसी कम्पोजिशन कराधान के अधीन है ।

परिदृष्य 3

सर्फ एक्सल मेटिक का एम.आर.पी (2 किग्रा पैक) – रुपये 379

  विवरणए.जेड.सी. प्रा.लि.कृष्णा एजेन्सी कौशिक स्टोर्स
लेनदेन का प्रकारB2BB2BB2C
जीएसटी विकल्पसामान्यकम्पोजिशनकम्पोजिशन
 लागत मूल्य (अ)264304
विक्रय मूल्य (ब)220304379
जी एस टी @ 20%4400
कुल लागत264304379
घटाएँ इनपुट टेक्स क्रेडिट4000
शुद्ध कुल लागत224304379
मार्जिन कम वृद्धिशील जीएसटी 
मार्जिन (ब) – (अ)204075
घटाएँ कम्पोजिशन करNA2430
शुद्ध मार्जिन 201645

जीएसटी लागत है क्योंकि कृष्णा एजेंसी और कौशिक स्टोर्स कम्पोजिशन कराधान के अधीन है।

परिदृष्य 4

सर्फ एक्सल मेटिक का एम.आर.पी (2 किग्रा पैक) – रुपये 379

विवरणए.जेड.सी. प्रा.लि.कृष्णा एजेन्सी कौशिक स्टोर्स
लेनदेन का प्रकारB2BB2BB2C
जीएसटी विकल्पसामान्यसामान्यकम्पोजिशन
आधार मूल्य (अ)220304
विक्रय मूल्य (ब)220253379
जी एस टी @ 20%44510
कुल लागत264304379
घटाएँ इनपुट टेक्स क्रेडिट40440
शुद्ध कुल लागत224260379
मार्जिन कम वृद्धिशील जीएसटी 
मार्जिन ((ब) – (अ)203375
घटाएँ कम्पोजिशन करNA030
शुद्ध मार्जिन 203345

जीएसटी लागत नही है क्योंकि कृष्णा एजेंसी सामान्य कराधीन है और जीएसटी लागत है क्योंकि कृष्णा स्टोर्स कम्पोजिशन कराधान के अधीन है।

हमें और क्या विचार करने की ज़रूरत है?

इसके अलावा, अनुपालन मोर्चे से, एक कम्पोजिशन वितरक को जीएसटी -4 के अनुसार त्रैमासिक रिटर्न दर्ज करने की आवश्यकता है। इस रिटर्न में, उन्हें माल और पूंजीगत वस्तुओं की विदेशी खरीद और सभी बाहरी आपूर्ति सारांश सहित उनकी खरीद के चालान के अनुसार विवरण प्रदान करने की आवश्यकता है। जीएसटी के तहत भी, कम्पोजिशन के तहत पंजीकृत कर योग्य व्यक्ति को खातें बनाए रखने और कानून के अनुसार सामग्री के लेनदेन के रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, जब इतने सारे विवरण की आवश्यकता है, तो कानून की मंशा यही है या यह सिर्फ एक भ्रम है?

यदि आप गहराई में जाते हैं, तब जब कम्पोजिशन वितरक बेचता है तो या तो वह अन्य कम्पोजिशन वितरक को बेचता है (जिनका जीएसटीआर-4 विक्रेता की आपूर्ति बन जाती है) या अन्य वितरको को (जिनका जीएसटीआर-2 विक्रेता की आपूर्ति बन जाती है)। दूसरे शब्दों में, जीएसटीएन सिस्टम पर आंतरिक और बाहरी आपूर्ति के ब्योरे के साथ पुस्तकों का पुनर्निर्माण किया जा सकता है। क्या यह वास्तव में डीलर को एक ब्रेक देता है और क्या आप कर अधिकारी की आंखों से बच सकते हैं?

तो यदि आप दो और दो एक साथ रख देते हैं, तो आपको खातों की किताबों को बनाए रखना होगा और सब से ऊपर, जांच के अधीन हैं।

इसके अलावा, इस रूप में जटिलताओं और प्रतिबंध हैं कि:

  • यदि आप एक राज्य में कम्पोजिशन का चुनाव करते हैं, तो आपको अन्य राज्यों में भी इसका चयन करना होगा
  • अन्तर-राज्यीय बिक्री (आईजीएसटी) करने में प्रतिबंध
  • रिवर्स चार्ज खरीदी आदि पर प्रतिबंध

इन सभी जटिलताओं के साथ, जीएसटी के तहत एक कम्पोजिशन कराधान, न तो व्यावहारिक और न ही फायदेमंद है।

हालांकि, उपर्युक्त सभी को नमक के चुटकी के साथ लिया जाना चाहिए। यदि व्यापारी पूरी तरह से बी 2 सी व्यवसाय में सम्मिलित है, तो कम्पोजिशन दर कम होगी और शुद्ध मार्जिन अधिक होगा, कम्पोजिशन एक व्यवहार्य विकल्प हो सकती है।

एक व्यापारी को जानकार से सलाह लेना चाहिए यदि वास्तव में इस योजना के तहत जाने में कोई लाभ है।

Co-authored by Sathya Pramod (Chief Financial Officer, Tally Solutions) and Shivadutt B (Company Secretary and Head – Legal, Tally Solutions).

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