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किसी भी अर्थव्यवस्था में सभी वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य निश्चित मैट्रिक्स के आधार पर बनाया जाता है। भारत में मौजूदा कर व्यवस्था में, इस मूल्य की गणना अलग अलग तरीकों से की जाती है। इसका सिंहावलोकन नीचे दी गई तालिका में दिया गया है:

टॅक्स (कर)माल / सेवाओं का मूल्य
आबकारी करलेन – देन की लागत या माल की मात्रा या उसकी एमआरपी
वैटबिक्री मूल्य के आधार पर
सेवा करप्रदान की गई सेवा की अनुसार गिनी जानेवाला टॅक्स का योग्य मूल्य

वस्तुओं और सेवाओं का मूल्यांकन

वर्तमान कर व्यवस्था

हमें वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य के एक उदाहरण की मदद से, वर्तमान शासन में गणना कैसे की जाती है इस पर नजर डालते हैं:

सुपर कार्स लिमिटेड, एक कार निर्माता, 6,000 रुपये के स्पेयर पार्ट्स उनके डीलर रविंद्र ऑटोमोबाइल को बेचता है। स्पेयर पार्ट्स की एमआरपी 10,000 रुपये है। रविंद्र ऑटोमोबाइल के लिए जारी किया गया चालान नीचे सचित्र है:
Value of goods and services for tax

जीएसटी व्यवस्था के तहत

हमनें जीएसटी में वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यांकन की पद्धति वर्णन करने के लिए एक ही उदाहरण का इस्तेमाल किया है:

GST Value Calculation
*ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स पर 18% की जीएसटी मानते हुए

जीएसटी की व्यवस्था में, माल और / या सेवाओं का मूल्य जो लेनदेन मूल्य के प्रारूप में दिया गया हैं, अर्थात् कीमत चुकाई / देय है, जो उदाहरण में 6,000 रुपये है।

जीएसटी की व्यवस्था में अतिरिक्त प्रभार और व्यय

जीएसटी की व्यवस्था में डिस्काउंट और पैकिंग के रूप में आनेवाले मूल्य को और अतिरिक्त प्रभार के उपर क्या विचार किया जाएगा? उन्हे लेनदेन मूल्य से बाहर रखा जाना चाहिए या शामिल करना चाहिए?

हम इस उदाहरण पर अब विचार करेंगे|

सुपर कार्स लिमिटेड, रविंद्र ऑटोमोबाइल को 4,00,000 रुपये की एक कार बेचता है।

  • वे कार पर 5,000 रुपये का पैकिंग मूल्य जोड़ते हैं|
  • दीवाली योजना के रूप में वे मूल्य पर 1% की छूट प्रदान करते हैं|
  • अगर रविंद्र ऑटोमोबाइल्स महीने के ३१ तारीख से पहले नेट बॅंकिंग द्वारा भुगतान करती हैं तो सुपर कार्स लिमिटेड 0.5% की एक और छूट प्रदान करने के राज़ी होती हैं| और इन सब के मुताबिक रवीन्द्र ऑटोमोबाइल्स ३१ तारीख से पहले भुगतान कर देती हैं|

जीएसटी के तहत, रविंद्र ऑटोमोबाइल के लिए जारी किया गया चालान इस तरह दिखेगा:
discounts in GST
*मान लिया जाये कि कार पर 18% की जीएसटी लगाई गयी हैं

चालान में,

  • 5,000 रुपये की पैकिंग प्रभारी, लेनदेन मूल्य में शामिल है।
    पैकिंग शुल्क या कोही भी आकस्मिक व्यय जो पहले या वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति के समय पर दिया गया हैं वे शुल्क लेनदेन के अंतिम मूल्य में शामिल किया जाना चाहिए।
  • 1% की छूट की लेनदेन मूल्य से कटौती की जाती है।
    पहले या आपूर्ति के समय में छूट दी जानेवाली है, और जो चालान में दर्ज की गई है, उसका अंतिम लेनदेन की मूल्य से कटौती की जाएगी|
  • 0.5% की छूट की चालान में से कटौती नहीं की हैं, क्यूंकी 0.5% की छूट आपूर्ति के बाद दी जानेवाली हैं, यह चालान में नहीं दिखाया जाएगा। हालांकि, बाद में छूट, आपूर्ति के समय में गिनी जाएगी, और इसे विशिष्ट चालान के साथ जोड़ा जा सकता है, छूट दी गयी राशि को अंतिम लेनदेन मूल्य से कम किया जा सकता है। इस के लिए, सुपर कार्स लिमिटेड 2,360 रुपए में रविंद्र ऑटोमोबाइल के लिए एक क्रेडिट चलन जारी करेगा (4,00,000 रुपये के 0.5% = रुपये 2,000+ जीएसटी @ 18% 2,000 रुपये = 360 रुपये पर), और यह प्रासंगिक कर बीजक के साथ जोड़ा जाना चाहिए|
    डिस्काउंट जो की आपूर्ति के बाद, पहले, या आपूर्ति के समय में दिया जानेवाला था उसे विशेष रूप से प्रासंगिक चालान से जोड़ा जा सकता है, लेनदेन मूल्य से इसकी कटौती की जा सकती है।

इस नियम के अपवाद क्या हैं?

उत्तर: छूट आपूर्ति के बाद दी, तो आपूर्ति के समय में वह नहीं गिना जाता है।

हम एक उदाहरण के साथ यह समझते हैं।

सुपर कार्स लिमिटेड 4,00,000 रुपये की एक कार रविंद्र ऑटोमोबाइल को बेचता है। खड़े समझौते के अनुसार, 30 दिनों की अवधि में क्रेडिट भुगतान करने के लिए अनुमति दी है। हालांकि, एक गंभीर नकदी की कमी की वजह से, सुपर कार्स लिमिटेड, रविंद्र ऑटोमोबाइल्स को 2 दिनों के भीतर भुगतान करने के लिए अनुरोध करता हैं ,जिस पर उन्हे 2% की अतिरिक्त छूट देनेका वादा सूपर कार्स लिमिटेड करती हैं| रविंद्र ऑटोमोबाइल्स 2 दिनों के भीतर भुगतान करता है।

इस परिदृश्य में, आपूर्ति के समय छूट के बारे में जानकारी नही थी, इसलिए इसे जीएसटी गणना के लिए प्रस्तुत लेनदेन मूल्य से कटौती करने का दावा नहीं किया जा सकता है।

लेनदेन मूल्य पर छूट देने पर पड़ने वाले प्रभाव का एक सारांश नीचे दिया गया है-

छूट के प्रकारलेनदेन मूल्य पर गिरनेवाला प्रभाव
डिस्काउंट पहले से या आपूर्ति के समय में दिया जाता है, और चालान में दर्ज किया जाता हैतो लेनदेन मूल्य से कटौती के रूप में दावा किया जा सकता हैं
छूट, आपूर्ति के बाद दी गई है तो, लेकिन इसे आपूर्ति के पहले या आपूर्ति के समय में सहमति दी गयी हैं, और यह विशेष रूप से प्रासंगिक चालान से जोड़ा जा सकता है|लेनदेन मूल्य से इसकी कटौती करने का दावा किया जा सकता हैं|
छूट, आपूर्ति के बाद दिया जाती है, आपूर्ति करनेके समय में इसके बारे में जानकारी नही थीलेनदेन मूल्य से कटौती के रूप में दावा नहीं किया जा सकता है

 

आपूर्ति का खर्च और विभिन्न मूल्य का लेनदेन मूल्य पर कैसे प्रभाव गिरता हैं यह नीचे दिखाया गया है-

आपूर्ति से संबंधित प्रभार / खर्चलेनदेन मूल्य पर गिरनेवाला प्रभाव
कमीशन और पैकिंग के रूप में आनेवाले आकस्मिक व्ययलेनदेन मूल्य में शामिल हैं
आपूर्तिकर्ता के लिए विलंबित भुगतान करने पर पूछे जानेवाला ब्याज / विलम्ब शुल्क / दंडलेनदेन मूल्य में शामिल हैं
सब्सिडी (केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा प्रदान की सब्सिडीयो को छोड़कर)लेनदेन मूल्य में शामिल हैं
जीएसटी के अलावा लगनेवाले अन्य टॅक्सेसलेनदेन मूल्य में शामिल हैं
आपूर्तिकर्ता द्वारा देय राशि जिसका भुगतान प्राप्तकर्ता द्वारा झेला गया हैं|लेनदेन मूल्य में शामिल हैं

यह उम्मीद है कि जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) ने देश में टैक्स परिदृश्य में प्रत्यक्ष परिवर्तन लाएगा। जैसे देश की कर प्रणाली को सरल बनायी गयी हैं, वैसे उत्पाद के मूल्य निर्धारण, माल और सेवाओं के मूल्यांकन, और दूसरे विभिन्न पहलुओं में महत्वपूर्ण परिवर्तन का हम अनुभव करेंगे|

 

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