1.5 करोड़ से कम वार्षिक कारोबार वाला कोई भी व्यवसाय जो व्यापार, निर्माण या रेस्तरां में शामिल है कम्पोजिट योजना के तहत पंजीकृत हो सकता है। कम्पोजिट डीलरों को अपने जीएसटी रिटर्न को तिमाही आधार पर दर्ज करना होगा।

हालांकि जीएसटी कानून में नियमित डीलरों की तुलना में कम्पोजिट डीलरों के कुछ छूट हैं, फिर भी कुछ अनुपालन आवश्यकताएं हैं जो कम्पोजिट डीलरों के लिए चुनौती पूर्ण हो सकती हैं।

जीएसटी के युग में एक कम्पोजिट डीलर के रूप में कर देयता की सही गणना करना

यदि आप जीएसटी के तहत एक कम्पोजिट डीलर हैं, तो आपको अवगत होना चाहिए कि कर देयता की गणना के लिए आपके बिक्री कारोबार पर एक फ्लैट कर दर लागू है। लेकिन अब, वाणिज्यिक कर विभाग के अनुसार, कर देयता की गणना कर योग्य कारोबार पर की जानी चाहिए, न कि कम्पोजिट कारोबार पर।

अपने कर योग्य कारोबार को सही करने के लिए –

1) आपको प्रत्येक वस्तु को अपनी पुस्तकों में कर योग्य, शून्य, या शून्य रेटेड के रूप में वर्गीकृत करना होगा।
2) फिर आपको राशि की गणना करने के लिए कुल कर योग्य कारोबार पर फ्लैट कर दर लागू करनी होगी।

एक मामले पर विचार करें, जहां आपने जनवरी-मार्च तिमाही के लिए डेटा तैयार कर लिया है। अब आपको प्रत्येक आइटम को वर्गीकृत करने की आवश्यकता है। आप यह कैसे करेंगे? यदि अन्त में आप अधिक भुगतान करते है तो क्या होगा?

क्या आपके बिल जीएसटी प्रारूप के अनुसार हैं?

जीएसटी के तहत एक कम्पोजिट डीलर के रूप में, जब आप बिक्री करते हैं तो कर चालान की बजाय आपको ‘बिल ऑफ सप्लाई’ जारी करना होगा। बिल को ‘बिल ऑफ सप्लाई’ शीर्षक दिया जाना चाहिए। दूसरा, आप अपने बिलों में जीएसटी चार्ज नहीं कर सकते हैं। आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आपके बिल केवल वस्तुओं और अतिरिक्त शुल्क का मूल्य दिखाएं, और अनुपालन के लिए आवश्यक कोई कर नहीं।

दाखिल करने से पहले जीएसटीआर-4 सही ढंग से तैयार करना

कम्पोजिट डीलरों को तिमाही आधार पर जीएसटीआर-4 दर्ज करना होगा। जीएसटीआर-4 में, आपको प्रदान करने की आवश्यकता है –

1) पंजीकृत डीलरों से किए गए सभी क्रय के लिए चालान विवरण
2) रिवर्स शुल्कों को आकर्षित करने वाले क्रय
3) अपंजिकृत डीलरों से क्रय किया माल
4) सेवाओं का आयात
5) पंजीकृत क्रेडिट नोट्स और डेबिट नोट्स का विवरण जो या तो पंजीकृत या अपंजीकृत डीलरों से जारी या प्राप्त किए गए हैं, अलग-अलग प्रदान किया जाना होगा।

साथ ही, आपको वर्तमान कर अवधि या पिछली कर अवधि में उत्पन्न कर चालानों के आधार पर प्राप्त अग्रिम राशि को विभाजित कर के घोषित करना होगा।

रिवर्स शुल्कों को आकर्षित करने वाले लेनदेन के लिए, आपको अपने करों की सटीक गणना करने की आवश्यकता है। रिटर्न दाखिल करने से पहले ये सभी विवरण जीएसटीआर-4 में सही ढंग से दिखाई देना चाहिए।

समग्र डीलरों के लिए ई-वे बिल बनाने में चुनौतियां

50,000/- रुपये से अधिक के माल के परिवहन के लिए एक ई-वे बिल की आवश्यकता है। हालांकि कुछ राज्यों ने माल के अंतर्राज्यीय आवागमन के लिए इसे अनिवार्य बना दिया है, कुछ ने माल के अंतर-राज्य आवागमन के लिए भी अनिवार्य बना दिया है। ई-वे बिल पूरे भारत में 1 अप्रैल से लागू होने की उम्मीद है।

ई-वे बिलों के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले लेनदेन का हिसाब रखना एक चुनौती हो सकती है। ई-वे बिल बनाने के लिए ई-वे बिल पोर्टल में एक बार फिर से सभी चालान विवरण दोबारा दर्ज करने के लिए यह एक बोझिल प्रक्रिया भी है। सभी लेन-देन की पहचान करना भी मुश्किल है जिसके लिए ई-वे बिल अभी तक बनाए नहीं गए हैं। आप इस तरह के लेनदेन कैसे फ़िल्टर करेंगे?

निष्कर्ष

हालांकि जीएसटी युग में कम्पोजिट डीलरों को अपने रिटर्न को तिमाही आधार पर दर्ज करना होगा, फिर भी उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके दिन-प्रति-दिन लेन-देन सही तरीके से दर्ज किए जाएं ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपने जीएसटीआर -4 रिटर्न दर्ज कर सकें और जीएसटी अनुपालन में रह सकें ।

यदि आप एक कम्पोजिट डीलर हैं, तो Tally.ERP 9 आपके लिए तैयार है। यह आपकी सभी चुनौतियों को पूरा करता है और आपके लिए जीएसटी अनुपालन का प्रबंधन कर सकता है।

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Author: Abbas MIS