परिचय

भारत का सदियों पुराना सोने की धातु का उद्योग दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है जो सभी देशों के लिए आभूषण के आयात और निवेश की जरूरतो को पूराकरता है। आयात के वलबड़ी मांग के कारण नहीं बल्कि 1.2 अरब लोगों की आबादी के कारण भी अधिक है। भारत के स्वर्ण बाज़ार में 30,000 से अधिक जौहरी होने का अनुमान है, जिनमें ज्यादातर छोटे व्यवसाय चलाने वाले शामिल हैं।

निम्नलिखित चार्ट, पिछले 90 वर्षों में सोने की दरों के बारे में एक विचार पेश करेगा:

सालमूल्य (प्रति 10 ग्राम) रूपयों मेंसालमूल्य (प्रति 10 ग्राम) रूपयों मेंसालमूल्य (प्रति 10 ग्राम) रूपयों में
192718.37195790.6219872570.00
192818.37195895.3819883130.00
192918.431959102.5619893140.00
193018.051960111.8719903200.00
193118.181961119.3519913466.00
193223.061962119.7519924334.00
193324.05196397.0019934140.00
193428.81196463.2519945598.00
193530.81196571.7519954680.00
193629.81196683.7519965160.00
193730.181967102.5019974725.00
193829.931968162.0019984045.00
193931.741969176.0019994234.00
194036.041970184.5020004400.00
194137.431971193.0020014300.00
194244.051972202.0020024990.00
194351.051973278.5020035600.00
194452.931974506.0020045850.00
194562.001975540.0020057000.00
194683.871976432.0020068400.00
194788.621977486.00200710800.00
194895.871978685.00200812500.00
194994.171979937.00200914500.00
195099.1819801330.00201018500.00
195198.0519811800.00201126400.00
195276.8119821645.00201230680.00
195373.0619831800.00201329600.00
195477.7519841970.00201428006.50
195579.7819852130.00201526343.50
195690.8119862140.00201628623.50

यह सपष्ट है कि गृहस्थ लोगों और व्यापारियों ने भारत में सोने के जवाहरात पर GST के प्रभाव पर गहरी नजर रखी होगी।

पिछला दौर

जब सोना और आभूषणों की बात आती है तो, इसमें मुख्यत: दो लागते आती हैं: खरीद मूल्य और बनाने का शुल्क। पहले एक्साइज ड्यूटी और VAT खरीद मूल्य पर लागू होता था, आभूषण बनाने के शुल्क पर कोई कर नहीं लगता था, जो आम तौर पर सोने की वास्तविक खरीद मूल्य का 12% के करीब है।

हालांकि, एक्साइज ड्यूटी और VAT की वसुली करने से पहले, मुख्य रूप से देश में आयात किए जाने वाले सोने पर 10% सीमाशुल्क लगाया जाता था। नियुक्त किया गया कि 1% एक्साइज ड्यूटी शुल्क लिया जाएगा, इसके बाद VAT जिसकी अलग अलग राज्यों में अलग अलग दरें थी। जबकि अधिकांश राज्यों में 1% VAT लगाया जाता था, वहीं केरल जैसे राज्य थे जहां 5% VAT लिया जाता था। कुल मिलाकर, VAT की राष्ट्रीय औसत लगभग 1.2% था।

GST दौर

GST के कार्यान्वयन के बाद, सोने पर GST की मामूली वृद्धि लगभग 14% हो गई। इसलिए GST युग में सोने और सोने के गहनों की लागत मामूली सी अधिक है।

सोने की खरीद पर GST

3 जून 2017 को, बहुत प्रतीक्षा के बाद सोने और सोने के आभषणों पर GST की दरों की घोषणा की गई।जबकि GST के बाद सोने की कीमत 3% फ्लैट पर तय की गई थी, जबकि अनकटा हीरा और कीमती पत्थरों पर 0.25% दर पर लगाया गया। सोने के समान, रजत और पॉलिश किए गए हीरे के लिए 3% की दर तय की गई थी।

सोना बनाने पर GST/h4>

इसके इलावा सरकार ने सोना बनाने पर भी 5% GST लागू किया है। शुरू में सोना बनाने पर 18% शुल्क लागू किया गया था, परन्तु बाद में भारतीय आभूषण परिषदों और संस्थायो द्वारा अपील करने के परिणाम स्वरूप इसमें कमी की गई। यह उपभोक्ताओं के लिए भी राहत की बात थी। अन्यथा हमें उच्च दरों का बोझ सहना पड़ सकता था।

सोने पर आयात शुल्क

सोने पर एक ऐसा शुल्क जो GST में सम्मिलित नहीं किया गया वह है आयात शुल्क। सोने पर लगातार आकर्षक 10% आयात शुल्क जारी रहेगा, क्योंकि यह सोना प्रेमी राष्ट्रों में आयात का प्रमुख उत्पाद है।

पहला दौर बनाम GST का दौर

अगर हम पिछले दौर के और GST दौर के कराधान कि तुलना करें, यह कुछ ऐसा लगता है कि:

विवरणपिछला दौरGST दौर
मूल्य100.00100.00
सीमा शुल्क @ 10% (A)10.0010.00
मूल्य+ सीमा शुल्क110.00110.00
उत्पाद शुल्क @ 1% (B)1.10NA
मूल्य+ सीमा शुल्क+ उत्पाद शुल्क111.10110.00
VAT @ 1.2% (C)1.30NA
मूल्य+ सीमा शुल्क+ उत्पाद शुल्क + VAT112.40110.00
GST @ 3% (D)NA3.30
कुल खरीद मूल्य112.40113.30
प्रभार बनाना @ 12%13.2013.20
प्रभार बनाने पर GST @ 5% (E)NA0.66
कुलमूल्य125.60127.16
कुल कर (A+B+C+D+E)12.4013.96

की गई तुलना से पता चलता है कि सोने पर GST की दर GST के बाद थोड़ी बड़ने के लिए बाध्य है और प्रभावी कर की मात्रा 12.4% से बड़कर 13.96% हो गई है। हालांकि, श्रृंखला में ऋण का निर्बाध प्रवाह के लाभ में उम्मीद है कि GST के तहत करों में मामूली वृद्धि को नकारा जाएगा।

पुराने आभूषणों की बिक्री

भारत जैसे देशों में, जहां सोने की अधिक मांग है, यह एक आम घटना है जिसमें कई परिवार वाले पुराने सोने के गहनों को बेचते और थोड़ा सा ओर निवेश करके नए आभूषण खरीदते हैं। GST के तहत, इस तरह के पहलुओं को संभालने के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश दिए जाने की आवशयकता है। इसलिए निम्नलिखित निर्धारित किया गया है:

  • अगर पुराने गहने जौहरी को दिए जाते हैं, केवल कुछ संशोधन यारी मेक के लिए, तो इसे काम के रूप में ही लिया जाएगा और 5% GST शुल्क लिया जाएगा।
  • अगर पुराने गहने बेचकर मिली धन राशि से नए गहने खरीदे जाए तो बिक्री कर का भुगतान GST खरीद के तहत समायोजित किया जाएगा।
  • ग्राहक और जौहरी शुरू में चिंतित थे कि किसी व्यक्ति से पुराने आभूषण खरीद ने पर जौहरी रिवर्स चार्ज तंत्र के तहत 3% GST लागू करेगा- वास्तव में इसका मतलब है कि ग्राहक को प्रति ग्राम सोना बेचने पर कम मूल्य दिया जाएगा। हालांकि बाद में, GST परिषद ने स्पष्ट किया कि एक जौहरी ऐसी खरीद पर रिजर्व प्रभारी तंत्र के तहत किसी भी टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। हालांकि यह सुनिश्चित करने के लिए कि जौहरी ग्राहकों के लिए छूट का दुरुपयोग ना करे, इसलिए सरकार ने सुरक्षा जाल का निर्माण किया है। अगर सोने के गहने का एक अपंजीकृत प्रदायक किसी पंजीकृत प्रदायक को गहने बेचता है तो रिवर्स चार्ज तंत्र के तहत कर लागू होगा।

गोल्ड इंडस्ट्री पर GST का प्रभाव

सोने की कीमत

GST के बाद सोने की दर में स्पष्ट वृद्धि हुई है, जिससे कीमतें बड़ गई हैऔर मांग में गिरावट आई है। हालांकि, वर्तमान समय में GST के साथ कीमतों में इजाफा कम होता है और विदेशों में सोने की मांग को लेकर ज्यादा हो रहा है। जल्दी से आगे बड़ने वाले अमेरिकी डॉलर ने दुनिया भर में सोने के व्यापार में उच्च मात्रा में बढ़ोतरी की है, जिससे भारत में भी कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, उम्मीद है कि बाज़ार स्थिरता हासिल करने के बाद, भारत में कीमतें भी स्थिर हो जाएंगी।

सोने की तस्करी

GST के तहत कर वृद्धि भी अज्ञात रूप से भारत में अधिक तस्करी को प्रोत्साहित कर सकती है जो कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है जो लगभग 800 टन प्रति वर्ष विदेशों से सोने को खरीदते हैं। सोने की तस्करी बड़ने से अगस्त 2013 में सोने पर कस्टम ड्यूटी बढ़कर 10% हो गई। GST के बाद सोने की दर बड़ने से तस्करी को प्रोत्साहन मिला। यही वजह है कि विशेषज्ञों ने सरकार को कहा है कि वह आयात शुल्क कम करें ताकि तस्करी को कम किया जा सके। कम आयात कर कानूनी आय बढ़ाने में मदद कर सकता है और राजस्व कर में भी बढ़ोतरी होगी।

काउंटर के तहत खरीद

पिछले वर्ष, जब भारत में नोट बंधी की लहर चली थी, तब रातों रात काले धन को सोने के रूप में परिवर्तित किया जा रहा था। जिसके परिणाम स्वरूप नवंबर में सोने की मांग में भारी उछाल आया था। वास्तव में GST का प्रभाव सोने पर इतना विशाल था कि सोने का आयात बड़कर लगभग 100 टन प्रति माह हो गया।

इसी प्रकार, GST के तहत, कुल मिलाकर सभी करों में लगभग 1.5% वृद्धि ने कालाबाज़ार में अधिक लेन देन को बढ़ाया है। संभावित रूप से बड़े जौहरी जो नियमों से बंधे हैं उनकी बिक्री को कम करने के लिए, छोटे दुकानदरों का झुकाव बिना रसीद के सामान बेचने की तरफ बड़ा है।

हालांकि, दूसरी ओर, यह देखते हुए कि GST की निर्बाध और पारदर्शी प्रकृति को टैक्स में बढ़ोतरी होने की संभावना है, GST दौर में अधिक छोटे और असंगठित खिलाडियों को एक संगठित रिपोर्टिंग संरचना में जाते हुए, टैक्स नेट को और बड़ा करना और इसके अतिरिक्त सरकार के लिए राजस्व लाने में, देखा जा सकता है।

राज्यों को मुआवजा

पूरे भारत में ज्यादातर राज्यों में टैक्स में वृद्धि देखी गई थी, केरल जैसे राज्य में जहां VAT दर 5% थी, GST के बाद प्रभावी सोने की दर में गिरावट आई। इस प्रकार, केरल में खरीदारों को पहले से सोने की कीमत कम खरचनी पड़ रही है, जिससे राज्य सरकार को GST दौर में राजस्व में कमी का डर है। यह देखते हुए सरकार ने मुआवजे के लिए प्रावधान किए है, उम्मीद की जाती है कि सोने के लिए उच्च VAT दरवाले राज्यों द्वारा उठाए गए समान चिंताओं को कुलता में पेश किया जाएगा।

जौहरी संचालन

इस उद्योग को सोने के गहने बेचने के लिए देश में मान की कृत बिलिंग प्रक्रियाओं पर स्पष्टता की आवश्यकता है, क्योंकि कुछ जौहरी मेकिंग चार्जेस अलग अलग दिखाते हैं, जबकि कई इसे सोने की किमत में शामिल रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का कहना है कि मेकिंग चार्जेस, अपशिष्ट और पत्थर, अन्य चीजों को सोने के आभूषण बेचने के समय बिक्री चालान में अलग से दिखाया जाना चाहिए। यह समझना जरूरी है कि ज्यादातर जौहरी की अपनी खुद की विनिर्माण इकाई नहीं होती, इसलिए वे 5% GST श्रमिकों को गहने बनाने के लिए भुगतान करते हैं और केवल 3% ग्राहकों से इकट्ठा करते है। इस प्रकार, एक जौहरी को गहने की कीमत में प्रभार बनाने परअंतर कर में कारक होना चाहिए।

निष्कर्ष

भारत में सोने पर GST प्रभाव के सम्बन्ध में दीर्घ वृद्धि दृष्टिकोण ज्यादातर सक्रत्मक हैं। बड़े हुए करों के कारण धातु की तस्करी का भय मौजूद है, लेकिन यह भी देखना है कि समय के साथ स्थिति में सुधार आता है के नहीं। फिलहाल, स्वर्ण क्षेत्र में GST की सराहना की गई है, और यह आश्वस्त है कि इसका परिणाम सोने के विनिर्माण बाज़ार में अधिक पारदर्शिता से है – जिससे भारत में स्वर्ण जवाहरात पर GST का सक्रतमक प्रभाव पड़ता है।

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Pramit Pratim Ghosh

Author: Pramit Pratim Ghosh

Pramit, who has been with Tally since May 2012, is an integral part of the digital content team. As a member of Tally’s GST centre of excellence, he has written blogs on GST law, impact and opinions - for customer, tax practitioner and student audiences, as well as on generic themes such as - automation, accounting, inventory, business efficiency - for business owners.