सेकेंड हैंड डीलर उपयोग किए गए सामानों की खरीद और बिक्री में सौदा करते हैं। इन सामानों को जैसा है वैसे ही या मामूली नवीनीकरण के बाद बेचा जा सकता है। इस ब्लॉग में, हम इन डीलरों द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं की आंतरिक और बाहरी आपूर्ति पर जीएसटी के प्रभाव को समझेंगे। हम मार्जिन योजना के बारे में भी सीखेंगे, जो टैक्स चुकाने की एक योजना है, जो सेकेंड हैंड सामानों के डीलरों को पेश की जाती है।

सेकेंड हैंड सामान की बाहरी आपूर्ति

जब एक पंजीकृत सेकेंड हैंड सामान का डीलर सेकेंड हैंड सामान की आपूर्ति करते हैं, तो डीलर सेकेंड हैंड सामान पर जीएसटी चार्ज करने के लिए उत्तरदायी होता है। इसके लिए, डीलरों को 2 विकल्प दिए गए हैं:

  1. 1. पूर्ण लेनदेन मूल्य पर जीएसटी चार्ज करें। यहां, डीलर उपयोग की गई वस्तुओं की खरीद पर चुकाए गए कर के इनपुट टेक्स क्रेडिट का दावा करने के लिए पात्र है।

उदाहरण: कर्नाटक में पंजीकृत सेकेंड हैंड सामान के डीलर वीना मार्ट्स, दिल्ली में एक उपभोक्ता को रुपये 15,000 में उपयोग किए गए कैमरे की आपूर्ति करता है। कैमरा कर्नाटक में एक पंजीकृत डीलर से रुपये 10,000 में खरीदा गया था, जिस पर सीजीएसटी + एसजीएसटी प्रत्येक पर रु. 1,400 चार्ज किया गया था। (कैमरे पर लागू जीएसटी दर 28% है)

यहाँ वीना मार्ट रुपये 15,000 (विक्रय मूल्य) पर @ 28% से आईजीएसटी चार्ज किया जाएगा जो कि रुपये 4,200 होगा।.वीना मार्ट कैमरे पर सीजीएसटी + एसजीएसटी प्रत्येक पर रु. 1,400 की आईटीसी प्राप्त करेगा।
या

  1. माल पर अर्जित मार्जिन या लाभ पर जीएसटी चार्ज करें, यानी, बिक्री मूल्य और खरीद मूल्य के बीच अंतर पर। इसे मार्जिन स्कीम कहा जाता है, जिसे सेकेंड हैंड सामान के डीलरों को दिया गया है। हालांकि, इस योजना का लाभ उठाने के लिए एक डीलर को, निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा:
  • वस्तुओं को मामूली प्रसंस्करण के बाद या जैसी वह ही आपूर्ति की जानी चाहिए, जिससे वस्तुओं की प्रकृति नहीं बदलेगी
  • वस्तु की खरीद पर कोई इनपुट कर क्रेडिट नहीं लिया जाना चाहिए

उदाहरण: कर्नाटक में पंजीकृत सेकेंड हैंड सामान के डीलर वीना मार्ट्स, दिल्ली में एक उपभोक्ता को रुपये 15,000 में उपयोग किए गए कैमरे की आपूर्ति करता है। कैमरा कर्नाटक में एक पंजीकृत डीलर से रुपये 10,000 में खरीदा गया था, जिस पर सीजीएसटी + एसजीएसटी प्रत्येक पर रु. 1,400 चार्ज किया गया था। वीना मार्ट ने मार्जिन स्कीम का चुनाव किया और इस तरह उपयोग किए गए कैमरे की खरीद पर इनपुट क्रेडिट का लाभ नहीं उठाया है और कैमरे को जैसा वह है वैसे ही आपूर्ति की है।

नोट: एक डीलर के लिए जिसने मार्जिन योजना का चयन किया है, वहां एक परिदृश्य हो सकता है जहां सेकेंड हैंड सामान शून्य मार्जिन पर या खरीद मूल्य से कम कीमत पर बेचे जाते हैं। इस मामले में, आपूर्ति पर कोई जीएसटी लागू नहीं होगा।

सेकेंड हैंड सामान की अंदरूनी आपूर्ति

जब एक पंजीकृत सेकेंड हैंड सामान का डीलर उपयोग किया गया सामान खरीदता हैं, तो आपूर्ति या तो पंजीकृत व्यक्ति या अपंजीकृत व्यक्ति से हो सकती है। आइए इन दोनों मामलों में कर के प्रभाव को देखें:

पंजीकृत व्यक्ति से आवक आपूर्ति

जब एक पंजीकृत सेकेंड हैंड सामान का डीलर किसी पंजीकृत व्यक्ति से उपयोग किया गया माल खरीदता है, तो आपूर्तिकर्ता सामान पर लागू दर पर कर लगाने के लिए उत्तरदायी होता है। यदि सेकेंड हैंड सामान का डीलर मार्जिन योजना का विकल्प चुनता हैं, तो डीलर कर भुगतान के इनपुट कर क्रेडिट नहीं ले सकता है।

उदाहरण: वीना मार्ट ने 5 उपयोग किए कम्प्यूटर पंजीकृत डीलर लक्ष्मी सोल्यूशन से कुल 1,00,000 रुपये में खरीदे।
यहाँ, लक्ष्मी सोल्यूशन सीजीएसटी + एसजीएसटी प्रत्येक पर @ 9% की दर से लगाएगा (कम्प्यूटर पर लागू दर 18% है).इस तरह, रु. 9,000 प्रत्येक सीजीएसटी + एसजीएसटी इस खरीदी से वीना मार्टस् को देय होगा। यदि वीना मार्ट ने मार्जिन स्कीम का चुनाव किया है तो वे सीजीएसटी + एसजीएसटी के रु. 9,000 के लिए आईटीसी का लाभ नहीं ले सकेंगे।

अपंजीकृत व्यक्ति से आंतरिक आपूर्ति

जब एक पंजीकृत सेकेन्ड हैंड सामान का डीलर एक अपंजीकृत व्यक्ति से उपयोग किया सामान क्रय करता है, तो प्राप्तकर्ता रिवर्स चार्ज पर कर चुकाने के लिए उत्तरदायी होता है। हालांकि, अगर सेकेन्ड हैंड सामान का डीलर मार्जिन योजना का विकल्प चुनता हैं, तो डीलर अपंजीकृत व्यक्तियों की आंतरिक आपूर्ति पर टैक्स ऑन रिवर्स चार्ज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

नोट: ऐसे परिदृश्य हो सकते हैं जहां पंजीकृत सेकेन्ड हैंड सामान का डीलर उपभोक्ता से उपयोग किया सामान खरीदते हैं। चूंकि उपभोक्ताओं द्वारा बिक्री (उपयोग करने के दौरान या व्यापार के आगे बढ़ने के लिए) जीएसटी के अन्तर्गत नहीं है, सेकेन्ड हैंड सामान के डीलरों द्वारा उपयोग किए गए सामानों की उपभोक्ताओं से सेकेन्ड हैंड सामान की खरीद पर कोई कर देयता नहीं है।

उदाहरण: वीणा मार्ट्स, जिन्होंने मार्जिन योजना का चयन किया है, ने कर्नाटक में एक अपंजीकृत डीलर से 10,000 रुपये के मूल्य का इस्तेमाल किया गया कैमरा खरीदा है।

यहाँ, वीणा मार्ट रिवर्स चार्ज पर रुपये 1400 के सीजीएसटी + एसजीएसटी को भुगतान करने के बाध्य नहीं है (कैमरे पर लागू जीएसटी दर 28% है)

निष्कर्ष

सेकेन्ड हैंड सामान के डीलरों के लिए, मार्जिन योजना को सेकेन्ड हैंड आपूर्ति पर कर चुकाने के विकल्प के रूप में दिया गया है। मार्जिन योजना का चयन करने का लाभ यह है कि डीलर को केवल बिक्री पर अर्जित मार्जिन पर कर चुकाना होगा। यह उन डीलरों के लिए बहुत उपयोगी है जो अधिकतर अन्तिम ग्राहक से उपयोग किया सामान खरीदते हैं। चूंकि इन खरीदों पर इनपुट टेक्स क्रेडिट की कोई प्रयोज्यता नहीं है, इसलिए इन डीलरों को केवल बिक्री पर अर्जित मार्जिन पर कर चुकाना होगा। हालांकि, योजना के लिए चुनने वाले डीलरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि माल पर आईटीसी का लाभ नहीं उठाया जा रहा है और सामानों को बहुत थोड़े प्रसंस्करण के बाद या जैसा वह है वैसे ही आपूर्ति की जाती है, जो माल की प्रकृति को नहीं बदलेगी।

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