27 वीं जीएसटी परिषद की बैठक में, जीएसटी परिषद ने सबसे पहले जीएसटी रिटर्न जमा करने की नई प्रक्रिया की घोषणा की। 28 वीं जीएसटी परिषद की बैठक में, नए जीएसटी रिटर्न और रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया को मंजूरी दे दी गई है। एक सप्ताह के भीतर, व्यवसाय, सीए और उद्योग के अन्य सदस्यों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए, नए जीएसटी रिटर्न फॉर्मों का मसौदा सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है। नवीनतम अपडेट के अनुसार, जीएसटी परिषद द्वारा जनवरी, 2019 से नई रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया को लागू किए जाने की संभावना है। व्यवसायों के लिए जीएसटी रिटर्न जमा करने की प्रक्रिया में प्रस्तावित परिवर्तनों को जानना महत्वपूर्ण है। इस ब्लॉग में, हम नई जीएसटी रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया के प्रमुख बिन्दुओं को समझेंगे।

अ) 5 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाले व्यक्तियों के लिए सरलीकृत मासिक रिटर्न

5 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने वाले नियमित करदाता अब सरलीकृत मासिक रिटर्न दर्ज कर सकते हैं। नए जीएसटी रिटर्न फॉर्म में 2 मुख्य टेबल होंगे:

  • बाहरी आपूर्तियाँ
  • आपूर्तिकर्ता द्वारा अपलोड किए गए चलान के आधार पर इनपुट टेक्स क्रेडिट

मासिक रिटर्न की देय तिथि अगले महीने की 20 तारीख होगी। हालांकि, जीएसटीएन सर्वर पर अवांछित भार से बचने के लिए, नई जीएसटी रिटर्न फाइलिंग तिथियों को व्यवसाय के कारोबार के आधार पर, अलग कर दिया जाएगा।

ब) 5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले व्यक्तियों के लिए त्रैमासिक वापसी

5 करोड़ रुपये (1.5 करोड़ रुपये की पूर्व सीमा की तुलना में) तक का कारोबार करने वाले व्यवसायों को तिमाही रिटर्न जमा करने का विकल्प होगा। तिमाही रिटर्न जमा करने वाले व्यवसायों को करों का भुगतान करना होगा और मासिक आधार पर इनपुट टेक्स क्रेडिट का लाभ उठाना होगा। इन व्यवसायों के पास 3 प्रकार के नए जीएसटी रिटर्न फाइल करने का विकल्प है:

  • सहज: जो व्यवसाय भारत में आपूर्तिकर्ताओं से खरीदते हैं और केवल भारत के उपभोक्ताओं को आपूर्ति करते हैं (बी2सी) सहज रिटर्न का विकल्प चुन सकते हैं।
  • सुगम: जो व्यवसाय भारत में आपूर्तिकर्ताओं से खरीदते हैं और केवल भारत में अन्य व्यवसायों और उपभोक्ताओं (बी2बी + बी2सी) को आपूर्ति करते हैं, वे सुगम रिटर्न जमा कर सकते हैं
  • त्रैमासिक रिटर्न : व्यवसाय जो आयात, निर्यात, सेज को आपूर्ति करते हैं, तिमाही रिटर्न जमा करने का विकल्प चुन सकते हैं। त्रैमासिक रिटर्न मासिक रिटर्न के समान होगा लेकिन यह आसान होगा और मासिक रिटर्न में सम्मिलित कुछ विवरणों को भरने की आवश्यकता नहीं होगी, जैसे गुम हुए चालान, लंबित चालान, छूट की आपूर्ति इत्यादि। हालांकि, इन विवरणों को अभी भी त्रैमासिक रिटर्न दाखिल करने वाले व्यवसायों द्वारा उनके वार्षिक रिटर्न में भरना होगा।

स) सरलीकृत नई जीएसटी रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया: अपलोड-लॉक-पे

नई वापसी फाइलिंग प्रक्रिया को ‘अपलोड-लॉक-पे’ के रूप में सारांशित किया जा सकता है। इसका मतलब है की:

अपलोड करें: आपूर्ति के लिए चालान को विक्रेताओं द्वारा निरंतर अपलोड किया जाएगा। अगले महीने के 10 तारीख तक अपलोड किए गए चालान, क्रेता के लिए इनपुट टेक्स क्रेडिट के लिए उपलब्ध होंगे।

लॉक: विक्रेताओं द्वारा अपलोड किए गए चालान लगातार क्रेताओं द्वारा देखे जा सकते हैं और लॉक किए जा सकते हैं। यहाँ ‘लॉक’ का अर्थ विक्रेता द्वारा अपलोड किए गए चालान को स्वीकार करना है। क्रेताओं के पास चालान को अस्वीकार करने, लंबित के रूप में चिह्नित करने के विकल्प भी हैं।

पे: लॉक किए गए चालान पर इनपुट टेक्स क्रेडिट का दावा करने के बाद करदाता आपूर्ति पर देय कर का भुगतान कर सकते हैं।

यहां, ध्यान देने योग्य बिंदु यह है कि वर्तमान रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया के विपरीत, केवल आपूर्तिकर्ता द्वारा अपलोड किए गए चालानो को ही क्रेताओं को इनपुट टेक्स क्रेडिट के लिए विचार किया जाएगा। क्रेताओं को चालान अपलोड करने के लिए कोई प्रावधान नहीं है।

यह प्रक्रिया यह भी सुनिश्चित करेगी कि नए जीएसटी रिटर्न विक्रेताओं द्वारा अपलोड किए और क्रेताओं द्वारा स्वीकार किए गए चालानों के आधार पर बड़े पैमाने पर स्वयं-भरे हुए हैं। साथ ही, सभी चालान जिन्हें क्रेता द्वारा लंबित या अस्वीकार नहीं किया जाता है, उन्हें रिटर्न के समय स्वीकार कर लिया जाएगा और लॉक किया जाएगा। ये कदम नए जीएसटी रिटर्न को दर्ज करने के लिए आवश्यक मैन्युअल प्रयास को कम कर देंगे, खासकर उन व्यवसायों के लिए जहाँ चालान की संख्या बहुत अधिक है।

द) प्रोफाइल-आधारित रिटर्न फाइलिंग

व्यवसायों को उनके द्वारा सामान्य रूप से दी जाने वाली और प्राप्त की जाने वाली आपूर्ति की प्रकृति के विवरण के साथ प्रोफाईल कॉन्फ़िगर करने की सुविधा होगी। इस कॉन्फ़िगरेशन के आधार पर, प्रत्येक व्यवसाय को भरने के लिए रिटर्न के केवल प्रासंगिक फ़ील्ड दिखाए जाएंगे। यह पुनः रिटर्न की प्रक्रिया को अनुकूलित और सरल बनाने के लिए एक कदम है।

ई) शून्य रिटर्न फाइलर्स के लिए एसएमएस द्वारा रिटर्न जमा करने की सुविधा

शून्य रिटर्न दाखिल करने वाले व्यक्ति (कोई खरीद और बिक्री नहीं) में केवल एक एसएमएस भेजकर जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की सुविधा होगी।

फ) जमा रिटर्न में संशोधन करने की सुविधा

व्यवसायों को चालान विवरण और पहले से जमा किए गए रिटर्न की अन्य जानकारी में संशोधन करने की सुविधा होगी। ‘संशोधन रिटर्न’ दर्ज करके रिटर्न में संशोधन किया जा सकता है और करदाता संशोधित रिटर्न के माध्यम से देय अतिरिक्त कर का भुगतान कर सकते हैं। इससे उन्हें ब्याज की देयता पर बचत करने में मदद मिलेगी, जबकि उन्हें विवरण में संशोधन करने के लिए अगले रिटर्न की प्रतीक्षा करनी पड़ती थी।

इस तरह, जीएसटी परिषद ने यह सुनिश्चित करने के लिए, कई बदलाव की योजना बनाई है कि नई जीएसटी रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया सभी व्यवसायों के लिए सरल और आसान हो सके। हालांकि, व्यवसायों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आने वाले बदलावों के लिए तैयार रहें और नई जीएसटी रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया में एक आसान संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को स्थापित करें। हमारे आने वाले लेखों में, हम इन परिवर्तनों में से प्रत्येक को अधिक विस्तार से समझने में आपकी सहायता करेंगे।

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