हमने पिछले ब्लॉग में जीएसटी परिषद द्वारा पेश किए गए विभिन्न वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं के लिए GST दर की बदलाव के बारे में पढ़ा। वास्तव में दरो में कटौती का उपभोक्ताओ ने स्वागत किया है, और पहली नजर से यह व्यापारियो के लिए एक अच्छी खबर है क्योकि, GST के दरो में कमी का अनिवार्य रूप से यही मतलब है की कटौती के कारण कर से अधिक क्रेडिट लिया जाएगा।

आइए हम उन सामान पर विचार करते है जिस पर ट्रेडर द्वारा खरीदी के समय 28% कर लगाया गया था, पर ब्रिकी समय पर उसका GST दर 18% हो गया। एक पल के लिए यदि हम सोचते है की खरीद और ब्रिकी कीमते सुसंगत है, तो इसका प्रभावी ढंग से यही मतलब है की व्यापारी 18% कर के बदले 28% कर का उपयोग कर रहा है, और इस तरह ITC का मूल्य 10% होता है।

इसी तरह, GST दरो मे परिवर्तन के कारण संभवित ITC दर निम्न होता है;

GST दर में बदलाव संभवित ITC स्तर
28% से 18%10%
28% से 12%16%
28% से 5%23%
18% से 12%6%
18%से 5%13%
12% से 5%7%
5% से 0%5%
3% से 0%3%

अब ये सवाल उठता है – इस अप्रयुक्त आईटीसी का क्या होता है? क्या यह अवरोध पूंजी यह क्रेडिट ब्योरे में बिन उपयोगी रहना जारी रखेगी? या एसा कोई तरीका है जिसमे हम ये बिन उपयोगी पूंजी का उपयोग कर सकते है? अच्छी खबर यह है की इस पूंजी को प्रबंधित की जा सकती है, आपकी पूंजी का उपयोग हो यह सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापारी के रूप में आपके पास दो विकल्प है।

विकल्प 1: माल की ब्रिकी से उत्पन होने वाले देयधन को जिनके दरो में बदलाव नही हुए है उसके साथ इस टेक्स क्रेडिट को ऑफसेट करे

यह ध्यान में रखते हुए कि सामानों की एक बड़ी संख्या को 28% से 18% तक रेट निम्न किया गया है, चलिए इसके बारे में एक उदाहरण लेते हैं। ऐसा सोचिए की एक व्यापारी ने स्टोक A खरीदा है, जो दर परिवर्तन से पहले जिस माल की किंमत 1000 रुपिए थी उस श्रेणी का माल उसने खरीदा है और 10% दर निचे जाने पर वह व्यापारी उसे बेचने की योजना बना रहा है,

  • व्यापारी की खरीद किंमत = INR 1000
  • भुगतान किया हुआ GST = INR 280 = उपयोग्युक्त ITC
  • ब्रिकी मूल्य = INR 1100 (10% मार्जिन)
  • एकत्रित GST = INR 198 = कर देय
  • अनुपयुक्त ITC = INR 280 –198 = 82

अब वास्तविक रूप से उसी व्यापारी को अन्य वस्तुओं से भी निपटना चाहिए, जिनके लिए दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। चलिए अब हम मानते है की एक व्यापारी ने मूल्य 1000 रुपये का स्टोक B खरीदा है, जो 18% कर की श्रेणी में आता है, और वह फिर इसे 10% के मार्जिन पर बेचता है,

  • व्यापारी की खरीद किंमत = INR 1000
  • भुगतान किया हुआ GST = INR 180 = उपयोग्युक्त ITC
  • ब्रिकी मूल्य = INR 1100 (10% मार्जिन)
  • एकत्रित GST = INR 198 = कर देय
  • अनुपयुक्त ITC = INR 180 – INR 198 = – INR 18 = बचा हुआ कर

इस प्रकार, यहाँ पे एक प्रमुख अवलोकन यह है की परिद्र्श्यो में जहा GST दरो में कोई बदलाव नही हुआ है वही भी व्यापारी उसने खुद जितना रेट देकर सामन खरीदा है अपने ग्राहक से उसे कई ज्यादा GST एकत्रित करेगा, उसका सरल कारण यह है की उनका ब्रिकी मूल्य खरीद मूल्य से ह्म्मेशा अधिक होगा, क्योकि वह ह्म्मेशा उत्पादन की किंमत में अपना लाभ जोड़ता है, इस तरह से कुछ मार्जिन में वह सामान बेचता है ।

जब वह महीने के लिए रिटर्न फाइल करता है, तब उसे अनुपयुक्त ITC को स्टोक A के परिणाम स्वरूप दिखाना होगा, और उसके क्रेडिट के बचे हुए 82 रुपिए वह स्टोक B की ब्रिकी से उत्पन लंबित कर देय को ऑफसेट करने के लिए उपयोग कर सकता है। यह भी स्पष्ट है की स्टोक B का अधिक मूल्य उसके कर दायित्व को बढ़ा देगा। और समय की अवधि में स्टोक A के लिए उसका इस्तमाल कर सकते है।

विकल्प 2: अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट की वापसी

GST कानून के मुताबिक, करदाता मासिक आधार पर कर अवधि के अंत में अप्रयुक्त आईटीसी का धन वापसी का दावा कर सकता है। इनपुट टैक्स क्रेडिट की उलटाव तब दी जाएगी, जहा इनपुट टैक्स क्रेडिट संचय उल्टे ड्यूटी संरचना के कारण किया गया है जिसमे खरीदी पर इनपुट दर ब्रिकी के आउटपुट दर से अधिक है। हालाकि कुछ् एसी आपूर्तिया है जहा डयूटी जमा हो जाने पर भी ITC की वापसी की अनुमति नहीं दी जा सकती। रिफंड पाने के दावो की प्रक्रिया के लिए कुछ समय रेखाए निर्धारित की गई है, और यदि 60 दिनों के भीतर ITC वापस नही किया गया तो उसे 65% ब्याज के साथ वापस करना होगा, इसके आलावा दावे का 90% हिस्सा 7 दिनों के अंदर ही भुगतान किया जाएगा। दावा न्यूनतम दस्तावेज के साथ दायर किया जाना चाहिए, और धनवापसी की राशी सीधे ही दावेदार के बेंक खाते में जमा हो जानी चाहिए। यह प्रक्रिया ऑनलाइन है ओर परेशानी से बिलकुल मुक्त है, और अधिकारी भी इसमें बहोत कम दखल देते है।
निष्कर्ष में यह कहा जा सकता है की हाल में GST दर में बदलाव के कारण व्यापारियो को अप्रयुक्त ITC के उपयोग के बारे में चिंता नही करनी चाहिए। अन्य वस्तुओ के ब्रिकी के परिणाम स्वरूप यदि कर देय हासिल नही किया गया है तो इसमें एक स्वच्छ प्रावधान है की इस तरह की ITC के रिफंड का दावा भी किया जा सकता है।

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Pramit Pratim Ghosh

Author: Pramit Pratim Ghosh

Pramit, who has been with Tally since May 2012, is an integral part of the digital content team. As a member of Tally’s GST centre of excellence, he has written blogs on GST law, impact and opinions - for customer, tax practitioner and student audiences, as well as on generic themes such as - automation, accounting, inventory, business efficiency - for business owners.