जीएसटी के तहत, भुगतान में देरी होने पर ब्याज का भुगतान करना होता है। कर दाता के साथ-साथ विभाग द्वारा ब्याज के भुगतान में देरी होने पर ब्याज का प्रावधान किया गया हैं। इस ब्लॉग में, आइए हम उन परिदृश्यों को समझें जहां ब्याज लागू होता है।

करदाता द्वारा कर के देर से भुगतान पर ब्याज

दो परिदृश्य जहां करदाता ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा:

  1. कर का देरी से भुगतान
  2. अधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया गया है या जहाँ दावा करने की पात्रता नही है / कर देयता वास्तविक कर से कम दिखाया गया है

ब्याज दर

परिदृष्यवार्षिक ब्याज दर
कर के देर से भुगतान18%
दावा किया आईटीसी अधिक या गलत है/ आउटपुट कर देयता में अतिरिक्त कमी24%

विभाग द्वारा भुगतान किया जाने वाला ब्याज

तीन परिदृश्य जहाँ विभाग करदाता को देरी से किए भुगतान पर ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है:

  1. किसी अपील या कार्यवाही के कारण किसी व्यक्ति को कर की वापसी रोक दी गई है, लेकिन जिसे बाद में भुगतान करने के योग्य माना जाता है
  2. धनवापसी के लिए आवेदन की प्राप्ति की तारीख से 60 दिनों के भीतर किसी व्यक्ति को कर की वापसी नहीं की गई है
  3. धनवापसी के लिए आवेदन प्राप्त होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर किसी निर्णय लेने वाले प्राधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण या अदालत द्वारा आदेश दिया गया धनवापसी किसी व्यक्ति को नहीं दी गई है।

ब्याज दर

परिदृष्यवार्षिक ब्याज दर
धनवापसी रोक दी गई है6%
रिफंड का भुगतान 60 दिनों के भीतर नहीं किया गया है6%
एक निर्णय प्राधिकारी या अपीलीय प्राधिकारी या अपीलीय न्यायाधिकरण या अदालत द्वारा धनवापसी आदेश के 60 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया है9%

इसलिए, ब्याज भुगतान के उदाहरणों से बचना, करदाता के रूप में आपके लिए अनिवार्य है। कर के भुगतान में डिफ़ॉल्ट आपके अनुपालन रेटिंग पर भी असर डालेगा। समय पर और सटीक अनुपालन आपको अनावश्यक कैश आऊटफ्लो से बचने और एक अच्छा अनुपालन स्कोर प्राप्त करने में मदद करेगा।

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