एक व्यापारिक दुनिया में, ऐसी स्थिति का होना काफी स्वाभाविक है जहां आपूर्तिकर्ता द्वारा माल की आपूर्ति की तारीख और माल की प्राप्ति की तारीख दो अलग-अलग महीनों में हों। मान लीजिए, आपूर्तिकर्ता ने मार्च, 2018 को माल का बिल बनाया और भेजा है, लेकिन वह आपको 3 अप्रैल 2018 को माल प्राप्त हुआ। आम तौर पर, इस स्थिति को ट्रांजिट में माल के रूप में जाना जाता है। इस लेख में, हम ट्रांजिट में माल पर आईटीसी के बारे में सब कुछ समझेंगे।

जीएसटी में ट्रांजिट में माल को कैसे संभालें

जबकि ट्रांजिट की स्थिति के कईअच्छे कारण हैं, लेकिन इस स्थिति में माल पर जीएसटी का का आकलन थोड़ा कठिन है।
आपको आश्चर्य होगा क्यों? दो अलग तिथियों पर प्राप्त लेकिन उसी महीने से संबंधित बिलों की तुलना में यह स्थिति अलग कैसे है?

जवाब देने के लिए, हमें आईटीसी का दावा करने के लिए जीएसटी कानून में निर्धारित शर्तों को समझने की जरूरत है।

निम्नलिखित स्थितियां हैं जिन्हें पंजीकृत व्यवसायों को आईटीसी का दावा करने के लिए पूरा करने की आवश्यकता है।

  • आपके पास पंजीकृत व्यक्ति द्वारा जारी कर चालान / डेबिट या क्रेडिट नोट होना चाहिए।
  • सामान / सेवाएं प्राप्त हो चुकी होनी चाहिए।
  • आपको संबंधित माह के लिए जीएसटी रिटर्न्स दायर करना चाहिए।
  • आपूर्तिकर्ता द्वारा या तो नकदी में या आईटीसी के उपयोग के माध्यम से सरकार को कर का भुगतान कर दिया गया है

यदि आप पहली 2 स्थितियों को बारीकी से देखते हैं, तो यह स्पष्ट रूप से बताते हैं कि आपके पास कर चालान होना चाहिए और अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि माल वास्तव में आपके द्वारा प्राप्त कर लिया जाना चाहिए। ट्रांजिट में माल पर जीएसटी के बारे में अधिक स्पष्ट होने के लिए, ऊपर दिए गए उदाहरण पर ध्यान करते हुए हम इस पर चर्चा करते हैं।

आपूर्तिकर्ता ने मार्च 2018 को बिल और माल प्रेषित किया है लेकिन आपको माल 3 अप्रैल, 2018 को प्राप्त हुआ है

उपर्युक्त मामले में, आप केवल अप्रैल 2018 के महीने में आईटीसी का दावा करने के लिए पात्र होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि, जब चालान और माल प्राप्त होते हैं, तभी आपको आईटीसी का दावा करने की अनुमति होती है। जीएसटी के तहत ट्रांजिट में माल पर आईटीसी का दावा करने का यही मौजूदा प्रावधान है।

प्रस्तावित परिवर्तन – जीएसटी के तहत ट्रांजिट में माल पर आईटीसी

प्रस्तावित सरलीकृत जीएसटी रिटर्न्स के साथ, ट्रांजिट में माल पर आईटीसी का दावा करने का प्रावधान सरल है। नया प्रस्ताव चालान की तारीख पर आईटीसी का दावा करने की अनुमति देता है, भले ही माल ट्रांजिट पर हो, परन्तु निम्नलिखित शर्तों को पूरा किया जाए:

  1. आपके आपूर्तिकर्ता को अगले महीने की 10 तारीख तक जीएसटी पोर्टल (बाहरी आपूर्ति अनुलग्नक) में कर चालान अपलोड करना होगा।
  2. आपको अगले महीने की 20 तारीख से पहले ऐसे माल प्राप्त हो जाना चाहिए।

आइए हम कुछ उदाहरणों के साथ जीएसटी के तहत ट्रांजिट में माल पर आईटीसी के इस बदलाव को समझें।

परिदृष्य-1

चालान की तिथिआपूर्तिकर्ता द्वारा चालान अपलोड करने की तिथिप्राप्तकर्ता द्वारा माल प्राप्त करने की तिथि
30 अप्रैल 20198 मई 201915 मई 2019

उपर्युक्त मामले में, आप अप्रैल 2019 के महीने में आईटीसी का लाभ उठाने के लिए 20 मई 2019 तक दावा दायर करने के लिए पात्र होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि चालान आपूर्तिकर्ता द्वारा 10 मई 2018 से पहले अपलोड किया गया है और माल 20 मई 2019 से पहले प्राप्त होता हैं जो अप्रैल, 2018 के महीने के लिए रिटर्न दाखिल करने की देय तिथि से पहले है।

परिदृष्य -2

चालान की तिथिआपूर्तिकर्ता द्वारा चालान अपलोड करने की तिथिप्राप्तकर्ता द्वारा माल प्राप्त करने की तिथि
30 अप्रैल 20198 मई 201925 मई 2019

उपर्युक्त मामले में, आप अप्रैल 2019 के महीने में आईटीसी का लाभ उठाने के लिए 20 मई 2019 तक दायर करने के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपने माल 20 मई 2019 से पहले प्राप्त नहीं किया हैं जो अप्रैल, 2018 के महीने के लिए रिटर्न दाखिल करने की देय तिथि है। आप मई 2019 के महीने में आईटीसी का दावा करने के लिए 20 जून 2019 तक दावा दायर करने के लिए पात्र होंगे।

परिदृष्य-3

चालान की तिथिआपूर्तिकर्ता द्वारा चालान अपलोड करने की तिथिप्राप्तकर्ता द्वारा माल प्राप्त करने की तिथि
30 अप्रैल 201915 मई 20199 मई 2019

उपर्युक्त मामले में, आप अप्रैल 2019 के महीने में आईटीसी का लाभ उठाने के लिए 20 मई 2019 तक दायर करने के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपूर्तिकर्ता द्वारा चालान 10 मई 2019 के बाद अपलोड किया गया है। आप मई 2019 के महीने में आईटीसी का दावा करने के लिए 20 जून 2019 तक दावा दायर करने के लिए पात्र होंगे।

निष्कर्ष

जीएसटी के तहत ट्रांजिट में माल पर आईटीसी का दावा करने पर प्रस्तावित सरलीकरण, व्यवसायों को उन सभी वस्तुओं पर अतिरिक्त आईटीसी दावा करने में मदद करेगा जो ट्रांजिट में हैं लेकिन जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की देय तिथि से पहले प्राप्त हुए हैं। यह जीएसटी के तहत ट्रांजिट में माल पर आईटीसी का दावा करने के मौजूदा प्रावधान की तुलना में लंबित चालान की संख्या को कम करने में भी मदद करता है।

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