ई-वे बिल के लागू होने के साथ, व्यवसाय और ट्रांसपोर्टर एक बार फिर ई-वे बिल नियमों के बारे में अपने ज्ञान को चमकाएँगे, और उन सभी परिदृश्यों के लिए खुद को लैस करेंगे जिसमें ई-वे बिल बनाने की आवश्यकता है। यह न केवल पंजीकृत व्यवसायों के लिए बल्कि अपंजीकृत आपूर्तिकर्ताओं के लिए भी सही है, जो पंजीकृत व्यवसायों या अन्य अपंजीकृत डीलरों को माल की आपूर्ति कर सकते हैं। विस्तृत ई-वे बिल नियम निर्धारित किए गए हैं, जो ई-वे बिल के तहत अपंजीकृत डीलरों द्वारा की गई आपूर्ति के बारे में विशेष रूप से बात करते हैं, जिसे हम इस ब्लॉग में विस्तार से देखेंगे।

हम मूल प्रश्न से आरम्भ करेंगे – “जब एक अपंजीकृत आपूर्तिकर्ता द्वारा माल की आपूर्ति की जाती है तो क्या ई-वे बिल आवश्यक है?”

इससे पहले कि हम इसका उत्तर देने का प्रयास करें, चलिए जीएसटी के तहत अपंजीकृत डीलरों से खरीदे गए माल के संबंध में विभिन्न संभावनाएं तैयार करते हैं। एक अपंजीकृत आपूर्तिकर्ता निम्न प्रकार के प्राप्तकर्ताओं को माल की आपूर्ति कर सकता है:

  • पंजीकृत
  • अपंजीकृत

ई-वे बिल के तहत पंजीकृत डीलर द्वारा अपंजीकृत व्यापारियों को आपूर्ती

ई-वे बिल नियमों के अनुसार, यदि अपंजीकृत डीलर पंजीकृत डीलर को माल की आपूर्ति कर रहा है, तो परिवहन प्राप्तकर्ता यानी पंजीकृत डीलर के द्वारा होने वाला माना जाएगा, बशर्ते माल के परिवहन से पहले प्राप्तकर्ता का ज्ञान हो।

अगर हम इस नियम से गुजरते हैं, तो हमें एक खंड मिलेगा – “बशर्ते प्राप्तकर्ता के बारे में माल के परिवहन के पहले ही ज्ञात हो”। इसका मूल रूप से मतलब है कि दो संभावनाएं हैं, जिसे हमें देखने की आवश्यकता है:

  • पंजीकृत प्राप्तकर्ता ज्ञात हो
  • पंजीकृत प्राप्तकर्ता अज्ञात हो

केस 1: पंजीकृत प्राप्तकर्ता ज्ञात हो

चूंकि प्राप्तकर्ता को माल के परिवहन के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है, इसलिए प्राप्तकर्ता यानी पंजीकृत डीलर इस मामले में ई-वे बिल बनाने करने के लिए उत्तरदायी होगा।

यह देखते हुए कि माल की आपूर्ति ई-वे बिल के तहत अपंजीकृत डीलरों द्वारा या तो अपने वाहन या किराए पर वाहन में या एक ट्रांसपोर्टर के माध्यम से की जा सकती है,या तो अपंजीकृत डीलर या ट्रांसपोर्टर के पास पोर्टल पर ई-वे बिल बनाने का विकल्प होगा यानी ई-वे बिल बनाने,या नही बनाने का चुनाव कर सकते है और उनके पास ऐसा करने की कोई देयता नहीं होगी।

केस 2: पंजीकृत प्राप्तकर्ता अज्ञात हो

इस परिदृश्य के लिए ई-वे बिल प्रावधानों को समझने से पहले, हम व्यावहारिक व्यावसायिक स्थितियों को समझें, जहां एक प्राप्तकर्ता ज्ञात नहीं हो सकता है।

शुरू करने के लिए हमें यह समझने की जरूरत है कि माल के परिवहन के शुरू होने के समय आपूर्तिकर्ता को उपलब्ध ज्ञान के आधार पर प्राप्तकर्ता को ज्ञात या अज्ञात समझा जा सकता है। जब माल को स्थानांतरित किया जा रहा है, यदि उस समय प्राप्तकर्ता ज्ञात हो, तो हमें केस 1 को संदर्भित करने की आवश्यकता है। लेकिन कुछ व्यावसायिक मॉडल में, अपंजीकृत आपूर्तिकर्ता अपने स्थान पर सामान का निर्माण करते हैं, और फिर वस्तुओं को एक सामान्य बाजार में बेचने के लिए लाते हैं, जहां बहुत खरीदार उपलब्ध हैं। ऐसी स्थिति में, अपंजीकृत आपूर्तिकर्ता माल के परिवहन के समय स्पष्ट रूप से नहीं जान पाएगा, जो वह आखिरकार किसे माल बेचने जा रहा है। ऐसी स्थिति में, ई-वे बिल अनिवार्य नहीं है।

हालांकि, पिछले मामले के समान, यहां भी, अपंजीकृत आपूर्तिकर्ता के पास ई-वे बिल बनाने का विकल्प होगा। वह नीचे दिखाए गए ई-वे बिल पोर्टल पर “नागरिक के लिए नामांकन” विकल्प पर क्लिक करके ऐसा कर सकता है:

नोट:यह विकल्प पोर्टल पर अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है, लेकिन ई-वे बिल रोल-आउट 1 अप्रैल, 2018 को शुरू होने के बाद इसके सक्रिय होने की उम्मीद की जा सकती है ।

ई-वे बिल के तहत अपंजीकृत डीलरों को आपूर्ति करने वाले अपंजीकृत व्यापारी

ई-वे बिल नियमों के अनुसार, यदि ई-वे बिल के तहत अपंजीकृत डीलर अन्य अपंजीकृत डीलरों को सामान की आपूर्ति कर रहे हैं, तो ई-वे बिल उत्पन्न होने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यहां भी, अपंजीकृत आपूर्तिकर्ता के पास ई-वे बिल पोर्टल पर “नागरिक के लिए नामांकन” विकल्प से ई-वे बिल बनाने का विकल्प होगा, जैसा कि ऊपर चर्चा की गई है।

अपवाद – हस्तशिल्प वस्तुओं की अन्तर्राज्यीय आपूर्ती

जीएसटी के तहत अपंजीकृत डीलरों से खरीदे गए माल के मामले में एक उल्लेखनीय अपवाद हस्तशिल्प वस्तुओं है जिनकी आपूर्ति राज्य की सीमाओं में की जाती हैं। जैसा कि हमारे पिछले ब्लॉगों पर चर्चा की गई है, इस तरह के मामले में ई-वे बिल को माल के मूल्य पर ध्यान न देते हुए अनिवार्य रूप से बनाया जाना चाहिए, और ई-वे बिल बनाने की देयता उसी व्यक्ति यानी अपंजीकृत डीलर जो ऐसे सामान की आपूर्ति करता है, पर होती है।.

Are you GST ready yet?

Get ready for GST with Tally.ERP 9 Release 6

101,209 total views, 1 views today

Pramit Pratim Ghosh

Author: Pramit Pratim Ghosh

Pramit, who has been with Tally since May 2012, is an integral part of the digital content team. As a member of Tally’s GST centre of excellence, he has written blogs on GST law, impact and opinions - for customer, tax practitioner and student audiences, as well as on generic themes such as - automation, accounting, inventory, business efficiency - for business owners.