हमारे पिछले ब्लॉग में, हमने विभिन्न प्रावधानों के बारे में अध्ययन किया था, जो कुछ व्यावसायिक विशिष्ट परिदृश्यों जैसे स्थानांतरण, विलय और परिसमापन के लिए बकाया जीएसटी का भुगतान करने की देयता को परिभाषित करते थे। इस ब्लॉग में, हम कुछ और कंपनी विशिष्ट परिदृश्यों को देखेंगे – जैसे कि मृत्यु, विघटन, विभाजन, समाप्ति और पुनर्गठन के मामले में जीएसटी और संबंधित देयता का भुगतान कब करें।

मौत के मामले में देयता

यदि कोई कर योग्य व्यक्ति जो भुगतान न किए गए कर, ब्याज या दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, तो यह समझने के लिए कि जीएसटी का भुगतान कब और किसके द्वारा किया जाना है निम्नलिखित प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए :

  • यदि व्यवसाय जारी है – यदि व्यवसाय व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उसके कानूनी उत्तराधिकारी या कानूनी प्रतिनिधि या किसी भी अन्य व्यक्ति के द्वारा जारी रखा जाता है, तो वह कानूनी उत्तराधिकारी या कानूनी प्रतिनिधि को भुगतान न किए दायित्व के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।
  • यदि व्यवसाय जारी नहीं है – यदि व्यक्ति द्वारा किए गए व्यवसाय को, चाहे उसकी मृत्यु से पहले या उसके बाद, बंद कर दिया गया है, तो उसके कानूनी वारिस या कानूनी प्रतिनिधि बकाया राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे। हालांकि, भुगतान मृतक की संपत्ति से किया जाएगा, परन्तु केवल उस सीमा तक, जिस पर संपत्ति भुगतान न किए कर, ब्याज या दंड को पूरा करने में सक्षम है। किसी भी समय, कानूनी उत्तराधिकारी या कानूनी प्रतिनिधि व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी नहीं होंगे और बकाया जीएसटी का भुगतान करने के बारे में जागरूक होने की आवश्यकता नहीं होगी जैसे देय राशि।

नोट: मौत के मामले में देयता तभी मानी जाएगी यदि बकाया कर, ब्याज या जुर्माना, कर योग्य व्यक्ति की मृत्यु से पहले निर्धारित किया गया था, लेकिन मृत्यु के बाद बकाया या अनिश्चित है।

एचयूएफ / एओपी के विभाजन के मामले में देयता

यदि कोई कर योग्य व्यक्ति जो बकाया कर, ब्याज या दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) या असोशिएशन ऑफ परसन (एओपी) का हिस्सा है, और एचयूएफ या एओपी की संपत्ति विभिन्न सदस्यों या सदस्यों के समूह के बीच विभाजित है, प्रत्येक सदस्य या सदस्यों का समूह, संयुक्त रूप से या अलग-अलग, विभाजन के समय तक बकाया कर, ब्याज या जुर्माने का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा, और इसी प्रकार जीएसटी का भुगतान कब करना इस बारे में अच्छी तरह से सूचित होना चाहिए।
नोट:एचयूएफ या एओपी में विभाजन के मामले में देयता तभी मानी जाएगी यदि बकाया कर, ब्याज या जुर्माना, एचयूएफ या एओपी में विभाजन के पहले निर्धारित किया गया था, लेकिन विभाजन के बाद बकाया या अनिश्चित है।

फर्म के विघटन के मामले में देयता

यदि कोई कर योग्य व्यक्ति जो बकाया कर ब्याज या जुर्माना का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, साझेदारी फर्म है और फर्म भंग हो जाती है, तो साझेदार होने वाला प्रत्येक व्यक्ति संयुक्त रूप से और अलग-अलग, फर्म के उदय से विघटन के समय तक बकाया कर, ब्याज या दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगें । इस तरह के व्यक्ति को जीएसटी का भुगतान कब करना है यह निर्धारित करने के लिए देयता प्रावधानों को समझने की आवश्यकता है।

नोट: फर्म के विघटन के मामले में देयता तभी मानी जाएगी यदि बकाया कर, ब्याज या जुर्माना, फर्म के विघटन के पहले निर्धारित किया गया था, लेकिन विघटन के बाद बकाया या अनिश्चित है।

गार्डियनशिप या ट्रस्ट को समाप्त करने के मामले में देयता

यदि कोई कर योग्य व्यक्ति जो बकाया कर, ब्याज या दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है या तो वार्ड का गार्डियन है, वह जिनकी ओर से व्यवसाय करता है, या एक ट्रस्टी है जो लाभार्थी के लिए ट्रस्ट के तहत व्यवसाय करता है, और गार्डियशिप या ट्रस्ट को समाप्त कर दिया गया है, तो वार्ड या लाभार्थी कर योग्य व्यक्ति द्वारा देय समाप्ति के समय तक बकाया कर, ब्याज या दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे, जिसके बाद देय तिथि यानी जीएसटी का भुगतान कब किया जाए निर्धारित किया जा सकता है।

नोट: गार्डियनशिप या ट्रस्ट के समापन के मामले में देयता तभी मानी जाएगी यदि बकाया कर, ब्याज या जुर्माना, समापन के पहले निर्धारित किया गया था, लेकिन समापन के बाद बकाया या अनिश्चित है।

फर्म, एचयूएफ या एओपी द्वारा व्यापार को बंद करने के मामले में देयता

यदि कोई कर योग्य व्यक्ति जो बकाया कर, ब्याज या दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है, या तो एक फर्म या एचयूएफ या एओपी है, और फर्म, एचयूएफ या एओपी ने किसी कारण से व्यवसाय को बंद करने का फैसला किया है, तो देयता का अनुमान लगाने और जीएसटी का भुगतान कब करना है, समझने के लिए निम्नलिखित प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए :

  • ऐसी फर्म, एचयूएफ या एओपी द्वारा देय कर, ब्याज या जुर्माना, विघटन की तारीख तक निर्धारित किया जा सकता है, जैसे कि कोई विघटन नहीं हुआ था
  • प्रत्येक व्यक्ति, जो विघटन के समय फर्म या एचयूएफ या एओपी का भागीदार था, संयुक्त रूप से और अलग-अलग बकाया कर, ब्याज और जुर्माना के भुगतान के लिए उत्तरदायी होगा, जैसे कि वह खुद कर योग्य व्यक्ति था।.

नोट:व्यवसाय के विघटन के मामले में देयता तभी मानी जाएगी यदि बकाया कर, ब्याज या जुर्माना, विघटन के पहले या बाद में निर्धारित या लगाया गया है।

फर्म या एओपी के पुनर्गठन के मामले में देयता

कुछ मामलों में, फर्म या एसोसिएशन ऑफ परसन (एओपी) के संविधान में परिवर्तन किए जाते हैं, जिन्हें पुनर्गठन के रूप में जाना जाता है। ऐसे मामलों में, फर्म के सभी सहयोगी या एसोसिएशन के सदस्य, जो पुनर्गठन के समय वहां थे, संयुक्त रूप से और अलग-अलग बकाया कर, ब्याज और दंड का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होंगे, क्योंकि वे पुनर्गठन के पहले या बाद में मौजूद हैं। फर्म या एओपी के पुनर्गठन के मामले में देयता सभी परिस्थितियों में बनी रहेगी, और उन सभी हितधारकों द्वारा समझा जाना आवश्यक है कि जीएसटी का भुगतान कब करना है, इसके बारे में उन्हें जागरूक होने की आवश्यकता है।

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Pramit Pratim Ghosh

Author: Pramit Pratim Ghosh

Pramit, who has been with Tally since May 2012, is an integral part of the digital content team. As a member of Tally’s GST centre of excellence, he has written blogs on GST law, impact and opinions - for customer, tax practitioner and student audiences, as well as on generic themes such as - automation, accounting, inventory, business efficiency - for business owners.